किसान सभा ने महाराष्ट्र सरकार के ₹31,628 करोड़ राहत पैकेज की आलोचना करते हुए कहा कि सबसे जरूरी कदम किसानों को पूरी तरह कर्ज़मुक्त करना है। पैकेज में केवल ₹6,500 करोड़ नई सहायता है, बाकी राशि पुराने प्रावधानों और फसल बीमा का जोड़ है। किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, तो 10 अक्टूबर को सभी तहसील कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने बाढ़ और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए ₹31,628 करोड़ का राहत पैकेज घोषित किया। किसान सभा ने इस पैकेज की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सबसे जरूरी कदम किसानों को पूरी तरह कर्ज़मुक्त करना है, जो पैकेज में शामिल नहीं किया गया है। पैकेज में ₹18,000 करोड़ का फसल बीमा, प्रति हेक्टेयर ₹47,000 नकद और ₹3 लाख मनरेगा सहायता शामिल है, जबकि फसल नुकसान के लिए ₹6,175 करोड़ और रबी फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर ₹10,000 अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। यह राहत 29 जिलों के किसानों को मिलेगी, जहां लगभग 68 लाख हेक्टेयर फसलें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं।
किसान सभा का विरोध और वास्तविक समस्याएं
किसान सभा के नेता डॉ. अजित नवले समेत अन्य नेताओं ने कहा कि भारी बारिश में किसानों का बीज, खाद और अन्य सामग्री डूब गई, जिससे कर्ज चुकाना असंभव हो गया है। संगठन ने मांग की कि किसानों, खेतिहर मजदूरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और माइक्रोफाइनेंस कर्ज को पूरी तरह माफ किया जाए।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पैकेज को बड़ा राहत पैकेज दिखाया, लेकिन वित्तीय विश्लेषण में पाया गया कि 31,628 करोड़ रुपये में से केवल ₹6,500 करोड़ नए प्रावधान हैं। शेष राशि पूर्व घोषित योजनाओं और संभावित फसल बीमा दावों का जोड़ है। रोज़गार गारंटी योजना और एनडीआरएफ के तहत मिलने वाली सहायता को भी नए पैकेज का हिस्सा दिखाया गया, जो वास्तव में नए खर्च में शामिल नहीं है।
वास्तविक सहायता सीमित, अन्य राज्यों से कम
नई राशि केवल रबी फसलों के लिए ₹10,000 प्रति हेक्टेयर है। पंजाब में किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹50,000 की सहायता दी गई थी, जबकि महाराष्ट्र में कुल सहायता केवल लगभग ₹18,500 प्रति हेक्टेयर है। किसान सभा का कहना है कि यह पैकेज किसानों, खेतिहर मजदूरों और महिलाओं के लिए पर्याप्त राहत प्रदान नहीं करता।
किसान सभा की चेतावनी और विरोध प्रदर्शन
किसान सभा ने सरकार की चाल की कड़ी निंदा की और कहा कि सरकार को इन मामलों पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि किसानों को पूरी तरह कर्ज़मुक्त किया जाए, खेतिहर मजदूरों को 30,000 रुपये श्रम हानि मुआवजा, और प्रति एकड़ फसल नुकसान के लिए 50,000 रुपये मुआवजा दिया जाए। यदि सरकार इन मांगों को नहीं मानती है, तो किसान सभा 10 अक्टूबर को सभी तहसील कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगी।
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