अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष का आगाज़, जानिए ज्वार,बाजरा, कोदो के सेहत से भरे फायदे

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दुनिया में भारत मोटे अनाजों का गढ़ है, इसी कड़ी में भारत दुनिया भर में मोटे अनाजों की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए प्रयासरत है जिसको लेकर भारत नेवर्ष 2019 को मिलेट्स ईयर के तौर पर मनाया वहीं 2023 को भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के तौर पर मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ को प्रस्ताव दिया था, मसलन-2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के तौर पर मनाया जा रहा है मिलेट्स131 देशों में विकसित तथा एशिया और अफ्रीका में 59 करोड़ लोगों के लिए मिलेट्स पारंपरिक भोजन है मिलेट्स के प्राचीनतम साक्ष्य सिन्धु सभ्यता (3000 ई.पू.)में मिले।अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष का Slogan- “Rich in Heritage, full in potential” है।

मिलेट्स क्या हैं?

गेहूं, चावल समेत कई जैसे आमतौर पर उगाए जाने वाले अनाज की तुलना में मिलेट्स को अक्सर उच्चपोषण सामग्री के कारण “न्यूट्री-अनाज” कहा जाता है। मां और उनके बच्चों सहित मानव और पशु स्वास्थ्य में योगदान करते हैं। मिलेट्स में बाजरा, प्रोसो, फॉक्सटेल, बार्नयार्ड, लिटिल कोदो, ब्राउनटॉप, रागी और गिनीय मिलेट्स के साथ-साथ फोनियो, ज्वार (ग्रेट मिलेट्स) और टेफ सहित अनाज के विविध समूह शामिल हैं। यहउप-सहारा अफ्रीका और एशिया में लाखों किसानों के लिए घरेलू और पारंपरिक प्रधान फसल के रूप में काम करने वाले पहले फसलों में से एक है। मिलेट्स कम लागत वाली व कम उपजाऊ मिट्टी पर भी उग सकता है, कई फसल रोगों और कीटों के लिए प्रतिरोधी या सहिष्णु है और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में जीवित रह सकता है। मिलेट्स की आनुवंशिक विविधता विशिष्ट व्यावसायिक अनुप्रयोगों (चिकित्सा विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, विशेषत: रसायन विज्ञान) के लिए खाद्य क्षेत्र में या आला बाजारों में आय पैदा करने वाली गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक विकास के अवसर प्रदान करती है।

 छोटे दाने वाले शुष्क भूमि अनाज का एक विविध समूह
 जलवायु लचीला, खराब मिट्टी, सूखे और कठोर बढ़ती परिस्थितियों के प्रतिसहिष्णु
 उच्च उर्वरक और कीटनाशक की आवश्यकता के बिना, विभिन्न उत्पादन वातावरणों केअनुकूल
 पैतृक परंपराओं, संस्कृतियों और स्वदेशी ज्ञान का अभिन्न अंग
 पौष्टिक “पोषकअनाज” जो आहार फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट, प्रोटीन और लोहा सहित खनिज प्रदान करते हैं,
 मानव और पशुस्वास्थ्य के लिए अच्छा है (भोजन और फ़ीड के माध्यम से) असहिष्णुता और मधुमेह को दूर करने के लिए कमग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ ग्लूटेनमुक्त
 ग्रामीण, शहरी, क्षेत्रीय और सीमांत उत्पादन क्षेत्रों के लिए आय का एक स्रोत
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने मार्च 2021 में अपने 75वें सत्र में 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (IYM) घोषित किया। IYM 2023 मिलेट्स के पोषण और स्वास्थ्य लाभों और प्रतिकूल और बदलती जलवायु परिस्थितियों में खेती के लिए उनकी उपयुक्तता के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रत्यक्ष नीतिगत ध्यान देने का एक अवसर है। यह मिलेट्स के सतत उत्पादन को बढ़ावा देने का एक अवसर है, साथ ही उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए स्थायी मिलेट्स के अवसर पैदा करने की उनकी क्षमता को भी उजागर करता है।
भारत सरकार की तरफ से देश में मोटे अनाजों के लिए 3 उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जिसके तहत ज्वार बाजरा छोटी श्रेणी के मोटे अनाजों के उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए हैं।
केन्द्र सरकार की तरफ से बाजरा के लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किया गया है इसी तरह ज्वार के लिए भारतीय मिलेट्स संस्थान, हैदराबाद में उत्कृष्टता केंद्र बनाया गया है वहीं अन्य छोटे मिलेट्स के लिए कृषि विश्वविद्यालय, बैंगलोर में उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किया गया है।

भारत एशिया का 80% और वैश्विक उत्पादन का 20% मिलेट्स उत्पादन करता है


सन 1965-70 तक मिलेट्स- कुल खाद्यान्न टोकरी का 20% था, जो कि अब केवल 6% रह गया है चूंकि हरित क्रांति से गेहूं व चावल की फसलों को बढ़ावा मिलता गया व सीमांत किसान पारंपरिक फसलों से दूर होता गया, जिससे मिलेट्स के क्षेत्र में 56% कमी आई है, तथा साथ ही इसके उच्च उपज वाली किस्मों/संकरों को अपनाने से मिलेट्स की उत्पादकता में 228% का इजाफा भी हुआ है।

भारत का मिलेट व्यापार

भारत ने 2021-22 के दौरान 34.32 मिलियन अमरीकी डालर के बाजरा उत्पादों का निर्यात किया। वहीं 2020-21 में, 28.5 मिलियन अमरीकी डालर तथा 2019-20 में, 26.97 मिलियन अमरीकी डालर के मिलेट का निर्यात किया।
भारत के प्रमुख बाजरा निर्यातक देश यूएई, नेपाल, सऊदी अरब, लीबिया, ओमान, मिस्र, ट्यूनीशिया, यमन, यूके और यूएस हैं।
दुनिया में प्रमुख मिलेट आयात करने वाले देश इंडोनेशिया, बेल्जियम, जापान, जर्मनी, मैक्सिको, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और नीदरलैंड हैं।

भारत के मिलेट्स का कारोबार। सोर्स- FAOSTAT 2021

Source: FAOSTAT 2021


मिलेट्स के स्वास्थ्य लाभ

 सीलिएकरोग-
मिलेट्स ग्लूटिन मुक्त अनाज है इसलिए इसका उपयोग सीलिएक रोग के रोगियों के लिए किया जाता है।
 मधुमेह विरोधीगुण-
मिलेट्स खाने से रक्त ग्लूकोज प्रतिक्रिया कम होती है और ग्लाइको सिलेटेड हीमोग्लोबिन इस प्रकार, ग्लाइसेमिक इंडेक्स प्रदान कर के मधुमेह मेंलेटस के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
ऑक्सीडेटिव तनाव में कमी:
मिलेट्स के दानों में मौजूद फेनोलिक यौगिक मुक्त कणों को दूर करते हैं जो ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं।
कैंसर रोधी गुण:
मिलेट्स के अर्क का कैंसर सेल लाइन पर एंटी-प्रोलिफिक प्रभाव होता है। डीएनए क्षति को रोकता है और चरण -2 डिटॉक्सिफाइंग एंजाइम के उत्पादन को प्रेरित करता है।
एंटी-हाइपरटेंसिव:
मिलेट्स कम घनत्व वाले लिपो प्रोटीन के ऑक्सीकरण को रोकता है, जिससे लाइपेस गतिविधि कम हो जाती है, जिससे उच्चरक्त चाप की घटना कम हो जाती है।

विभिन्न प्रकार के मिलेट्स
बाजरा (Pearl Millet):- बाजरा एक ऐसी फसल है, जिसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों या उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी आसानी से उपजाया जा सकता है। भारत में बाजरे की खेती उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश,महाराष्ट्र और पंजाब आदि राज्यों में होती है। बाजरे का प्रयोग हमारे यहां परंपरागतरूप से होता आया है। सर्दियों के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में बाजरा से बनी रोटी, लड्डू, खिचड़ी व टिक्की को सबसे ज्यादा खाना पसंद किया जाता है। बाजरा की प्रकृति गरम होती है। इसमें ऊर्जा अधिक होती है जिससे बाजरा खाने वाले अधिक शक्तिशाली व एनर्जेटिक बने रहते हैं। बाजरे में पाए जाने वाले तमाम पोषक तत्वों में विटामिन, खनिज और कई कार्बनिक यौगिक, लोहा, पोटेशियम, जस्ता, कैल्शियम विटामिन बी और मैग्नीशियम है इसके अलावा बाजरा प्रोटीन और फाइबर से भी भरपूर होता है। इसलिए बाजरा अच्छे स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर खाद्य विकल्प माना जाता है।
इसके सेवन से शरीर मजबूत बनता है हड़ियाँ मजबूत होती हैं, खून की कमी पूरी होती है,कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है, कैंसर की सम्भावना कम होती है,अस्थमा में भी इसके सेवन से राहत मिलता है,और शुगर का स्तर कम होता है।

बाजरे में तमाम पोषक तत्वों में विटामिन, खनिज और कई कार्बनिक यौगिक, लोहा, पोटेशियम, जस्ता, कैल्शियम विटामिन बी और मैग्नीशियम होता है, इसके अलावा बाजरा प्रोटीन और फाइबर भी भरपूर होता है। फोटो- अरविंद शुक्ला, न्यूज पोटली
  1. पोषक तत्व
    बाजरा में मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, फास्फोरस, फाइबर (रेशा), विटामिन-बी और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं।
  2. दिल की बीमारी

बाजरा मैग्नीशियम और पोटैशियम का एक अच्छा स्रोत है जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल कर दिल की बीमारियों से बचाता है और आपको सेहतमंद बनाता है। इसलिए हृदयरोगियों के लिए अपने आहार में बाजरे को शामिल करनाअच्छा होता है, मैग्नीशियम में उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे हृदयरोग के जोखिम कारकों को रोकने की क्षमता है। अध्ययनों से पता चला है कि मैग्नीशियम एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने पर लाभकारी प्रभाव डालता है, स्ट्रोक को भी रोकताहै।

  1. पाचन क्रिया में सहायक
    बाजरा में फाइबर अधिक होता है जो पाचन क्रिया को ठीक रखकर हाजमे को दुरुस्त रखता है। साथ ही गैस, कब्ज और एसिडिटी से बचाता है। फाइबर की मात्रा और धीरे-धीरे पचने वाले स्टार्च की उपस्थिति के कारण बाजरा मधुमेह पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है, जो ग्लूकोज में परिवर्तित होने में अधिक समय लेता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।
  2. कैंसर से बचाने में मददगार

कैंसर के दौरान शरीर में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट की स्थिति में काफी कमी आ जातीहै। बाजरा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इसमें उच्च एंटी-ऑक्सीडेंट खाद्य पदार्थों को लेने जैसे बाजरा से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

  1. वजन घटाने में सहायक
    बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं तो जाड़े में बाजरा का सेवन करें। बाजरा में फाइबर होने के कारण पेट भरा-भरा रहता है और भूख कम लगती है। जिससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है। बाजरा शरीर के खाने को धीमी गति से पचाता है और इसमें मौजूद रेशों से पेट भरा महसूस होता है, इससे वजन और मोटापा दोनों को कम करने में सहायता मिलती है। इसमें विटामिन बी, हेल्थ बूस्ट करने वाला कैल्शियम और आयरन पाया जाता है, एक औसत बाजरे में लगभग 106 कैलोरी 2 ग्राम फाइबर 3 ग्राम प्रोटीन 1 ग्राम फैट 20 ग्रामआदि पाए जाते हैं
  2. डायबिटीज से बचाव
    नियमित रूप से बाजरे के सेवन से डायबिटीज का खतरा कम हो जाता हैं। डायबिटीज के मरीज इसे जरूर खाएँ फ्री रेडिकल्स के कारण डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। वहीं ग्लूकोस को अतिरिक्त लेने से भी कोशिकाएं खराब हो जाती हैं, जिसकी वजह से डायबिटीज हो जाती है। अध्ययन के अनुसार एंटी ऑक्सीडेंट इस स्थिति को काबू में रखते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट लेने से डायबिटीज के बाद होने वाली अन्य समस्याओं के खतरे भी कम हो जाते हैं। इसके अलावा एक अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि पोलीफेनॉल्स (Polyphenols) आपके खून से रक्त शकर्रा के स्तर को कम करता है।
  3. हड्डियों को मजबूत बनाए
    बाजरा खाने से कैल्शियम मिलता है जो हड्डियों को मजबूती देता है, जो आस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों से भी बचाता है। इसके साथ ही इसमें भरपूर मात्रा में फास्फोरस पाया जाता है। ये खनिज हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, 100 ग्राम बाजरा में 42 मिली ग्राम कैल्शियमऔर 296 ग्राम फास्फोरस पाया जाता है। इसका नियमित सेवन करने से हड्डियां मजबूत रहती हैं।
  4. गर्भवती महिलाओं महिलाओं के लिए फायदेमंद
    गर्भावस्था में बाजरे का सेवन फायदेमंद है। बाजरा में कैल्शियम भरपूर पाया जाता है। बाजरा गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे पौष्टिक अनाजों में से एक है। यह आयरन का भी अच्छा स्रोत है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करता है, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर और विटामिन भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
  5. ज्वार (Sorghum):-ज्वार की कई प्रजाति की खेती की जाती है, जिनमें से अधिकतर पशु के चारे के लिए उगाई जाती है ज्वार कि एक प्रजाति Sorghum bicolor खाने के काम आती है यह डायबिटीज कम करनेऔर वजन घटाने में काम आती है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होती है और फाइबर होने के कारण इस के सेवन से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिलतेहैं यह ग्लूटेनमुक्त और आसानी से उपलब्ध हो जाने वाला अनाज है।
    रागी (Finger Millet) :- रागी को महुआ और नाचनी नाम से भी जाना जाता है रागी Ca का बेहतरीन श्रोत है इसे 6 से 8 घंटे भिगो ने के बाद शिशु के लिए आहार तैयार किया जाता है यह सुपाच्य होता है कई खनिजों और फाइबर से भरपूर रागी डायबिटीज में भी खाने लायक अनाज है।
    चेना (Proso Millet) :– चेना फाइबर से भरपूर ग्लूटेन मुक्त मिलेट है इसमे विटामिन बी 6, मैग्नीशियम, जिंक, आयरन,फास्फोरस जैसे मिनरल्स तथा एमिनो एसिड मौजूद होते हैं इसके सेवन से खून की कमी नहीं होती, वजन नियंत्रित रहता है।
    कोदो (Kodo millet) :- यह लाल रंग का होता है और औषधीय गुणों से भरपूर होता है यह कफ और पित्तदोष को शांत करता है कोदो मिलेट को ब्लड प्यूरीफायर कहा जाता है यह डायबिटीज, हार्टडिजीज, कैंसर और पेट सम्बंधि समस्यायों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है कोदो मिलेट को लिवर व किडनी के लिए अच्छा अनाज बताया जाता है किडनी सम्बंधित रोगो में की तरह कार्य करता है।
    मिलेट्स विस्तार क्षेत्र-
     स्वस्थ और पौष्टिक भोजन के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता।
     ग्लूटिनमुक्त, कम GI(ग्लिसमिक सूचकांक), उच्च फाइबर जैसे रुझान बढ़ रहे हैं।
     विभिन्न फसलों के सापेक्ष पानी की आवश्यकता (वर्षा के मिमी में) नीचे दी गईहै (स्रोत: आईसीएआर, आईआईएमआर)
    • रागी: 350 मिमी
    • ज्वार: 400 मिमी
    • मक्का: 500 मिमी
    • गेहूं: 650 मिमी
    • चावल: 1250 मिमी
    मिलेट्स को अन्य अनाज की फसलों की तुलना में सबसे कम पानी की आवश्यकता होती है और इसलिए अनाज की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने का भविष्य विकल्प है।
     मिलेट्स पारिस्थिति की तंत्र में निवेश भारत में छोटे और सीमांत किसानों को प्रभावित करेगा।
     उच्च फाइबर, प्रोटीन, और कमग्लाइसेमिक इंडेक्स।
     आयरन और विटामिन सी से भरपूर एनीमिया को कम करने में मदद करता है।

लेखक, नसीब चौधरी, स्कॉलर, कृषि अर्थशास्त्र विभाग,
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

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