भारत में दूसरी दुग्ध क्रांति की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मिनेश सी. शाह ने बताया कि लक्ष्य देशभर में सहकारी समितियों के माध्यम से दूध की खरीद को 10 करोड़ लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाना है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, दूध की गुणवत्ता सुधारने और सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। केरल में MILMA ने भी 2030 तक ₹10,000 करोड़ का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
भारत अब दुग्ध क्षेत्र में नई क्रांति लाने की तैयारी में है। इसका लक्ष्य देश की दूध सहकारी समितियों को और मजबूत बनाना और अधिक किसानों को इस नेटवर्क से जोड़ना है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन मिनेश सी. शाह ने बताया कि इस पहल से देशभर में दूध की खरीद 10 करोड़ लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को मिलेगी नई ताकत
NDDB चेयरमैन ने कहा कि देश के 8 करोड़ से अधिक किसान दुग्ध क्षेत्र से जुड़े हैं, जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनाने में मदद की है। अब इस सफलता को अगले स्तर पर ले जाने की जरूरत है। केवल उत्पादन नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता में भी सुधार किया जाएगा।
मिलावट पर सख्ती और संगठित बाजार पर ध्यान
दूसरी दुग्ध क्रांति का मकसद दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट रोकना और संगठित दूध बाजार का हिस्सा बढ़ाना भी है। वर्तमान में संगठित बाजार केवल 32-35 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा पहुंचाया जाएगा।
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MILMA की योजना और विस्तार
केरल कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (MILMA) का कारोबार 2024-25 में ₹4,327.24 करोड़ रहा। MILMA ने 2030 तक ₹10,052 करोड़ वार्षिक कारोबार का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कई नई परियोजनाएं तैयार की गई हैं, जो सहकारी समितियों को मजबूत करेंगी और दूध उत्पादन व गुणवत्ता दोनों बढ़ाएंगी। भविष्य में MILMA के उत्पाद क्रूज़ शिप, बंदरगाह और हवाई अड्डों पर भी उपलब्ध होंगे।
केरल बनेगा देश का प्रमुख दूध उत्पादक राज्य
केरल की पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री जे. चिन्चुराणी ने कहा कि केरल के पास भारत का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य बनने की क्षमता है। राज्य सरकार चरागाह क्षेत्र का विस्तार कर दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सुधारने पर काम कर रही है। मंत्री ने यह भी कहा कि लागत कम करना और उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है, और इसके लिए किसानों को आधुनिक तकनीक और मजबूत विपणन नेटवर्क का इस्तेमाल करना होगा।
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