भारत की कॉफी निर्यात से होने वाली कमाई 2025 में 2 अरब डॉलर से ज्यादा होने वाली है। कीमतें बढ़ने से निर्यात मूल्य बढ़ा है, हालांकि मात्रा थोड़ी घटी है। इटली, जर्मनी और बेल्जियम भारत की कॉफी के बड़े खरीदार हैं।
भारत की कॉफी का निर्यात साल 2025 में पहली बार 2 अरब डॉलर (करीब 16–17 हजार करोड़ रुपये) का आंकड़ा पार करने जा रहा है। कॉफी बोर्ड के मुताबिक 16 दिसंबर तक करीब 1.97 अरब डॉलर की कॉफी विदेश भेजी जा चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 21 फीसदी ज्यादा है।
2 अरब डॉलर का आंकड़ा पार
रुपये में देखें तो इस साल अब तक कॉफी निर्यात से 17,106 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 13,624 करोड़ रुपये थी। अधिकारियों का कहना है कि चालू कैलेंडर और वित्तीय वर्ष—दोनों में भारत 2 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लेगा।
निर्यात करीब 6 फीसदी कम
हालांकि कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन निर्यात की मात्रा थोड़ी कम हुई है। इस साल 16 दिसंबर तक 3.66 लाख टन कॉफी का निर्यात हुआ, जो पिछले साल से करीब 6 फीसदी कम है। इसकी वजह यह है कि यूरोप के कुछ खरीदारों ने सस्ती कॉफी वाले देशों से खरीदारी शुरू कर दी।
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क्यों हो रही है महंगी?
भारतीय कॉफी की खासियत यह है कि इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से ज्यादा रहती है। भारतीय रोबस्टा और अरेबिका कॉफी को लंदन और न्यूयॉर्क बाजार की कीमतों से ऊपर प्रीमियम मिलता है, जिससे निर्यात की कुल कीमत बढ़ जाती है।पिछले कुछ वर्षों में ब्राजील और वियतनाम जैसे बड़े उत्पादक देशों में सप्लाई की दिक्कतों के कारण वैश्विक कीमतें बढ़ी हैं, जिससे भारतीय कॉफी निर्यात की कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है।
सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादन
भारत दुनिया में कॉफी उत्पादन के मामले में सातवें और निर्यात में पांचवें स्थान पर है। दुनिया के कुल कॉफी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 5 फीसदी है। इटली, जर्मनी, बेल्जियम, रूस और यूएई भारत की कॉफी के सबसे बड़े खरीदार देश हैं।