भारत ग्लोबल लेवल पर सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक बन गया है, जिसका एक्सपोर्ट साल 2024 में लगभग दोगुना होकर 1.29 बिलियन डॉलर हो गया है. प्रमुख खरीदारों में इटली, बेल्जियम और रूस शामिल हैं. एकीकृत कॉफी विकास परियोजना(आईसीडीपी) कॉफी उद्योग को मजबूत करने के लिए पैदावार में सुधार और खेती के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत अब विश्व स्तर पर सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है, जिसका निर्यात वित्त वर्ष 2024 में 1.29 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो 2020-21 में 719.42 मिलियन डॉलर से लगभग दोगुना है. जनवरी 2025 की पहली छमाही में, भारत ने इटली, बेल्जियम और रूस सहित शीर्ष खरीदारों के साथ 9,300 टन से अधिक कॉफी का निर्यात किया.
सबसे ज़्यादा उत्पादन अरेबिका और रोबस्टा कॉफ़ी
भारत के कॉफ़ी उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई उत्पादन अरेबिका और रोबस्टा बीन्स से होता है. इन्हें मुख्य रूप से बिना भुनी हुई फलियों के रूप में निर्यात किया जाता है.
मंत्रालय ने कहा कि हालांकि, रोस्टेड और इंस्टेंट कॉफी जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे निर्यात में तेजी आ रही है.
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11 सालों में घरेलू खपत 7000 टन बढ़ा
घरेलू खपत 2012 में 84,000 टन से बढ़कर 2023 में 91,000 टन हो गई है। 2022-23 में 248,020 मीट्रिक टन का योगदान देकर कर्नाटक उत्पादन में अग्रणी है, इसके बाद केरल और तमिलनाडु हैं.
बयान के अनुसार, एकीकृत कॉफी विकास परियोजना (आईसीडीपी) के माध्यम से पैदावार में सुधार, गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में खेती का विस्तार और कॉफी खेती की स्थिरता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
डेढ़ लाख आदिवासी परिवारों ने कॉफी उत्पादन में 20% की वृद्धि की
इसमें कहा गया है, “इसकी सफलता का एक प्रमुख उदाहरण अराकू घाटी है, जहां कॉफी बोर्ड और एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (आईटीडीए) के सहयोग से लगभग 150,000 आदिवासी परिवारों ने कॉफी उत्पादन में 20% की वृद्धि की है.”
ये उपाय भारत के कॉफी उद्योग को मजबूत करने, उत्पादकता बढ़ाने और इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं.
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