हरियाणा में रबी सीजन की फसलों के लिए फसल बीमा की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की गई है। इस बार किसानों को 5% ज्यादा मुआवजा मिलेगा। योजना में गेहूं, सरसों, जौ, चना, सूरजमुखी और मूंग शामिल हैं। किसान फसल मूल्य का 1.5% प्रीमियम देकर बीमा करा सकते हैं। पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी इसका लाभ ले सकेंगे।
हरियाणा सरकार ने रबी सीजन की फसलों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की है। किसानों से अपील की गई है कि वे समय पर बीमा करवा लें ताकि प्राकृतिक आपदा या फसल को नुकसान होने की स्थिति में उन्हें मुआवजा मिल सके। इस बार किसानों को पिछले साल की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा मुआवजा मिलेगा। उदाहरण के लिए, गेहूं की फसल पर मुआवजा ₹76,541 से बढ़कर ₹80,368 प्रति हेक्टेयर हो गया है। इसी तरह सरसों, जौ, चना, सूरजमुखी और मूंग जैसी फसलों के मुआवजे की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है।
| फसल | 2024-25 (₹/हेक्टेयर) | 2025-26 (₹/हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| गेहूं | 76,541 | 80,368 |
| सरसों | 51,373 | 53,942 |
| जौ | 48,779 | 51,218 |
| चना | 37,622 | 39,503 |
| सूरजमुखी | 51,892 | 54,487 |
| मूंग | 45,405 | 47,675 |
छह फसलें शामिल
इस साल रबी की छह फसलें गेहूं, सरसों, जौ, चना, सूरजमुखी और मूंग, योजना में शामिल की गई हैं। किसानों को फसल के बीमा मूल्य का 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। राज्य के 22 जिलों को तीन क्लस्टरों में बाँटा गया है, जिनमें अलग-अलग बीमा कंपनियां योजना चला रही हैं। क्लस्टर-1 में सिरसा, रोहतक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल, पंचकूला और रेवाड़ी हैं। क्लस्टर-2 में हिसार, सोनीपत, गुरुग्राम, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़ और अंबाला शामिल हैं। जबकि क्लस्टर-3 में यमुनानगर, पानीपत, पलवल, भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, मेवात और चरखी दादरी के जिले आते हैं।
ये भी पढ़ें – छत्तीसगढ़ से निकली पोषण वाली पहली चावल खेप, कोस्टा रिका को निर्यात
अधिकारियों को दिए निर्देश
कृषि विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक के मुताबिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को बीमा प्रक्रिया में किसी तरह की असुविधा न हो। इसके साथ ही, पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे किसानों को आवेदन के साथ पट्टा एग्रीमेंट की प्रति, आधार कार्ड और फसल बुवाई का प्रमाण-पत्र देना होगा। किसान अपने संबंधित बैंक, बीमा कंपनी या जिले के उप निदेशक (कृषि) कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
24 दिसंबर तक करा लें ये काम
जो किसान अपनी फसल में बदलाव करना चाहते हैं या किसी जानकारी में सुधार करना चाहते हैं, वे 24 दिसंबर तक बैंक या कृषि विभाग को इसकी सूचना दे सकते हैं। सरकार का कहना है कि नई दरों के अनुसार किसानों को नुकसान की स्थिति में पहले से ज्यादा मुआवजा मिलेगा, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा और राहत दोनों मिलेगी।
ये देखें –