महाराष्ट्र के नासिक के प्याज किसान खराब मौसम, गिरती कीमतों और बदलती सरकारी नीतियों से परेशान हैं। किसानों का कहना है कि उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही, इसलिए वे प्याज पर MSP की मांग कर रहे हैं। लगातार नुकसान झेलने के कारण कई किसान प्याज की खेती छोड़कर दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
महाराष्ट्र का नासिक जिला, जिसे भारत की प्याज राजधानी कहा जाता है और जहां एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है, पिछले तीन सालों से लगातार संकट में है। मौसम की अनिश्चितता, बार-बार बदलती सरकारी नीतियाँ और बाजार के उतार-चढ़ाव ने प्याज की खेती को एक तरह का जुआ बना दिया है।
किसानों की मांग
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र स्टेट ऑनियन प्रोड्यूसर फार्मर्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष भारत दिघोले ने बताया कि कभी बारिश ज़्यादा हो जाती है, कभी सूखा पड़ जाता है। सरकार की निर्यात नीति बार-बार बदलती रहती है। ऐसे में हम किसान अंदाजा ही नहीं लगा पाते कि प्याज की कीमत क्या होगी। अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
किसान संगठनों ने सरकार से तुरंत प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने की मांग की है ताकि उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से कुछ राहत मिल सके।
कृषि मंत्रालय का जवाब
कृषि मंत्रालय का कहना है कि MSP तय करने के लिए कई बातों को ध्यान में रखा जाता है जैसे फसल का शेल्फ लाइफ, उसका उत्पादन क्षेत्र, उपभोग मात्रा और खाद्य सुरक्षा में महत्व।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत राज्य सरकार चाहें तो प्याज को प्राकृतिक आपदाओं से बीमा सुरक्षा के लिए अधिसूचित कर सकती हैं।
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प्याज की खेती का चक्र और लागत
महाराष्ट्र में प्याज साल में तीन बार उगाई जाती है — रबी, खरीफ और लेट खरीफ सीजन में। रबी फसल (अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है, मार्च–मई में कटती है, जो कुल उत्पादन का करीब 70% हिस्सा होता है।वहीं खरीफ और लेट खरीफ फसलें बाकी 30% उत्पादन देती हैं।रबी फसल की अनुपस्थिति के समय यही खरीफ प्याज बाजार में सप्लाई बनाए रखती है।
खेती से दूरी बना रहे किसान
महाराष्ट्र के सांसदों ने चेतावनी दी है कि नासिक, पुणे और दिंडोरी जैसे बड़े प्याज उत्पादक इलाकों में किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।कई किसानों ने अपनी खेती का क्षेत्र डेढ़ एकड़ से घटाकर आधा एकड़ कर दिया है।प्याज किसानों के लिए MSP की मांग सिर्फ दाम की बात नहीं है, बल्कि जीविका बचाने का सवाल है।मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और गिरते दामों के बीच MSP उनके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह हो सकता है।
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