कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ शुरु की गन्ने की खेती, बीज बेचकर लाखों कमा रहा किसान

अयोध्या(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। किसान अधिक उपज के लिए कई प्रकार की तकनीकों का प्रयोग करते हैं। बुवाई की बात करें तो आजकल के युवा किसान पारंपरिक विधि की दरकिनार कर आधुनिक रूप से खेती कर रहे हैं। जिससे उपज के साथ मुनाफा भी अच्छा होता है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के केशवपुर गांव में रहने वाले युवा किसान रामसिंह,(35) सात एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं। वे गन्ना बुवाई, गुड़ाई, पेड़ी प्रबंधन में नई तकनीक का प्रयोग करते हैं। न्यूजपोटली की टीम से बात करते हुए वे बताते हैं ” 2017 के पहले मैं एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करता था। इसके बाद कुछ वैज्ञानिकों के सम्पर्क में आया जिन्होने मुझे गन्ने के बीज की खेती करने की सलाह दी। उसके बाद मैनें गन्ने की खेती शुरु करदी, आज की तारीख में हमारे पास गन्ने की लगभग सभी किस्में उपलब्ध हैं। अब हम मिल व किसान दोनों को गन्ना बेचते हैं।”

रामसिंह के मुताबिक वे गन्ने की बुवाई में लाइन से लाइन की दूरी 56 इंच और बड से बड की दूरी 9 से 12 इंच रखते हैं। वे गन्ने की नई वैराइटी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उन्होंने अपने खेत में गनने की उन्नत किस्में कोलख- 14201, 13235 ,सीओ-15023 ,सीओ-17231 और कोलख-16202 की बुवाई की है।

गन्ने की आधुनिक खेती के लिए रामसिंह ने लगभग 35 से 40 लाख रुपये के कृषि यंत्र खरीदे हैं। गन्ने की गुड़ाई के लिए भी उनके पास आधुनिक कृषि यंत्र हैं। खेत में खाद डालने के लिए आटोमैटिक स्प्रेयर है जिससे आधे घंटे में एक एकड़ खेत में खाद पड़ जाती है। गन्ने की जड़ में तक खाद पहुंचाने के लिए उन्होने गुड़ाई करने वाली मशीन में दो पाइप लगवाए हैं जिससे कि गुडाई के समय खाद आसानी से गन्ने की जड़ तक पहुंच जाती है।

रामसिंह बताते हैं उनके इलाके के दूसरे किसान पारंपरिक गन्ने की खेती करते हैं उनकी बुवाई में एकड़ में 30 से 35 कुंटल गन्ना लग जाता है लेकिन उत्पादन 210 से 250 कुंटल प्रति एकड़ ही होता है। जबकि वे एकड़ में 410 कुंटल प्रति एकड़ उत्पादन लेते हैं। पहली बार जब उन्होने गन्ने की बुवाई की थी तो पूरा गन्ना बीज में चला गया था।

इस बार उन्होंने कोलख-14201 के 200 बड से आधे एकड़ में लगाई थी। गन्ना तैयार होते ही पूरा गन्ना बीज के रुप में बिका गया। इससे उन्हे 6 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। उनका मानना है गन्ने की अच्छी उपज के लिए फसल का स्वच्छ रहना जरूरी है। किसी प्रकार का कीट और फंगस ना लगे। गन्ना गिरने ना पाये इसके लिए बंधाई जरुर करवाए।

वे गन्ने के फसल में सहफसली के रूप में मूंग, उड़द, काली सरसो, पीली सरसों, गेहूं और चना बोते हैं। उन्होंने मार्च के महीने में गन्ने की किस्म कोलख-16202 की बुवाई की थी जिसमें सहफसली के रुप में उड़द और मूंग लगाई है। इसबार उनके एक एकड़ गन्ने के खेत में 6 कुंटल निकली पीली सरसों निकली है।

गन्ना बीज उत्पादक का करवाया रजिस्ट्रेशन
रामसिंह के पास गन्ने की सभी नई किस्में मौजूद हैं । वे गन्ने के बीज मिल और किसानों को बेचते हैं। इससे उन्हे अच्छा रेट मिल जाता है।इसके लिए उन्होने गन्ना बीज उत्पादक के रूप में गन्ना शोध संस्थान शाहजहांपुर से रजिस्ट्रेशन करवाया है।

रामसिंह का पूरा वीडियो यहां देखें-

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