किसान जागृति यात्रा का ऐलान, कन्याकुमारी से कश्मीर तक किसानों को जोड़ने की तैयारी

किसान जागृति यात्रा का ऐलान

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल फरवरी से किसान जागृति यात्रा शुरू करेंगे, जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक जाएगी और 19 मार्च को दिल्ली में खत्म होगी। यात्रा का मकसद किसानों को MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, WTO से बाहर निकलने और सीड्स बिल जैसे मुद्दों पर जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि ज्यादा उत्पादन से नहीं, बल्कि सही दाम मिलने से ही किसान खुश हो सकते हैं।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पिछले साल उन्होंने पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर 130 दिनों से ज्यादा भूख हड़ताल की थी। अब वे सड़क पर उतरेंगे, लेकिन इस बार विरोध के लिए नहीं, बल्कि देशभर के किसानों को जागरूक करने के लिए।

2 फरवरी से शुरू होगी यात्रा
बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक डल्लेवाल ने बताया कि फरवरी के पहले हफ्ते में, संभवतः 2 फरवरी से, “किसान जागृति यात्रा” शुरू की जाएगी। यह यात्रा कन्याकुमारी से शुरू होकर कश्मीर तक जाएगी और 19 मार्च को दिल्ली में खत्म होगी। यात्रा के अंत में दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी किसान रैली करने की योजना है, जिसके लिए अनुमति मांगी जाएगी।

मुख्य मांगों क्या हैं?
डल्लेवाल ने कहा कि इस यात्रा के दौरान किसानों को उनकी मुख्य मांगों के बारे में बताया जाएगा, जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसानों का कर्ज माफ करना, भारत को WTO (विश्व व्यापार संगठन) से बाहर करना और भूमि अधिग्रहण कानूनों को वापस लेना शामिल हैं।

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ड्राफ्ट सीड्स बिल पर क्या कहा?
उन्होंने ड्राफ्ट सीड्स बिल पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि इससे भारतीय किसान विदेशी बीज कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगे। उनका कहना है कि तकनीक के नाम पर जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) बीज देश में आएंगे, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और किसान कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।

कृषि मंत्री के बयान पर क्या कहा?
केंद्रीय कृषि मंत्री के “अधिक उत्पादन से किसान खुश हैं” वाले बयान पर डल्लेवाल ने कहा कि यह सच्चाई से दूर है। उनके मुताबिक, ज्यादा उत्पादन का मतलब किसान की खुशी नहीं होता, क्योंकि किसान को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा।उन्होंने दोहराया कि उनकी सबसे बड़ी मांग है कि भारत किसी भी हाल में WTO से बाहर आए, क्योंकि जब तक ऐसा नहीं होगा, किसानों को असली फायदा नहीं मिलेगा।
आपको बता दें कि उनकी भूख हड़ताल खत्म होने से पहले केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच सात दौर की बातचीत भी हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया।

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