FAIFA का श्वेत पत्र: पर्माकल्चर आधारित खेती और निवेश योजना की बात

पर्माकल्चर आधारित खेती

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने किसानों के लिए आधुनिक और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए श्वेत पत्र जारी किया है। इसमें 50 लाख हेक्टेयर पर्माकल्चर आधारित खेती और 10,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव शामिल है। संगठन का लक्ष्य 50 कृषि निर्यात जोन बनाकर, कोल्ड चेन और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए कृषि निर्यात को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाना है।

किसानों के साथ मिलकर एक आधुनिक, टिकाऊ और मजबूत कृषि व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (FAIFA) ने एक श्वेत पत्र जारी किया है। इस श्वेत पत्र में सरकार को चार स्तरीय रणनीति अपनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसान आत्मनिर्भर बनें और देश का कृषि क्षेत्र और अधिक सशक्त हो सके।

किसानों को सशक्त बना रही सरकारी नीतियाँ
FAIFA के कार्यक्रम में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराज श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि सरकार की नीतियाँ खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने से लेकर नई तकनीक आधारित एग्रीकल्चर इकोसिस्टम तैयार करने तक किसानों को सशक्त बना रही हैं।

पर्माकल्चर आधारित खेती को बढ़ावा देने की बात
संगठन ने बताया कि पर्माकल्चर आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख हेक्टेयर भूमि को इसके अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है। इसके लिए 2026 से 2030 के बीच 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।

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क्या है पर्माकल्चर?
पर्माकल्चर (Permaculture) एक टिकाऊ कृषि और भूमि प्रबंधन तरीका है जो प्रकृति के तरीके अपनाता है। इसमें खेती, पशुपालन और पेड़ों को इस तरह मिलाया जाता है कि एक संतुलित और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बने। पर्माकल्चर मिट्टी और पानी की रक्षा करता है और कम संसाधन लगाकर ज्यादा उपज देता है। मतलब एक ऐसी खेती, जो पर्यावरण के अनुकूल हो, लंबे समय तक टिकाऊ रहे और किसानों को आत्मनिर्भर बनाए।

कृषि निर्यात 100 अरब डॉलर तक का लक्ष्य
FAIFA के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा कि संगठन का लक्ष्य 50 कृषि निर्यात जोन बनाना, कोल्ड चेन का विस्तार, गुणवत्ता प्रमाणन और उच्च मूल्य वाली फसलों में वैल्यू एडिशन के जरिए कृषि निर्यात को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

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