मिर्जापुर के किसान छोटेलाल सिंह ने मिर्च की खेती से अपनी जिंदगी बदल दी। वो बताते हैं कि सही जुताई, अच्छी खाद, गुणवत्तापूर्ण बीज, मल्चिंग और ड्रिप सिस्टम से फसल बेहतर होती है और लागत घटती है। एक बीघे में करीब ₹75,000 खर्च आता है, लेकिन मार्केट सही मिले तो ₹5–6 लाख तक का मुनाफा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के प्रगतिशील किसान छोटेलाल सिंह आज मिर्च की खेती से अपनी नई पहचान बना चुके हैं। कभी पारंपरिक खेती से गुज़ारा करने वाले छोटेलाल अब अच्छी आमदनी के साथ अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं। मुस्कुराते हुए वो कहते हैं,
“मिर्च की खेती ने मेरी ज़िंदगी बदल दी… सब कुछ इसी की बदौलत है।”

मिर्च की खेती के मूलमंत्र
छोटेलाल जी बताते हैं कि मिर्च की खेती में सफलता पाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है —
- खेत की तैयारी: गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें और मिट्टी को धूप में सूखने दें।
- खाद का उपयोग: एक बीघे में बुवाई से पहले लगभग 10–12 ट्रॉली गोबर की खाद डालें।
- अच्छा बीज चुनें: सिर्फ विश्वसनीय कंपनी का बीज लें ताकि पौधे मजबूत हों और फसल बेहतर मिले।
- मल्चिंग पेपर और ड्रिप सिस्टम: इससे पानी की बचत होती है, खरपतवार कम आता है और मजदूरी घटती है।

खर्च और मुनाफे का समीकरण
छोटेलाल जी बताते हैं,
“एक बीघे में करीब ₹75,000 का खर्च आता है, लेकिन अगर मार्केट अच्छा मिले तो ₹5 से ₹6 लाख तक का मुनाफ़ा हो सकता है।”
यानी मेहनत और सही तकनीक अपनाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं।

सही सलाह और समझदारी है जरूरी
छोटेलाल सिंह का कहना है कि खेती शुरू करने से पहले किसान को दवाओं, बीज और तकनीक की सही जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि कई बार दुकानदार गलत सलाह देकर नुकसान करा देते हैं।
वो कहते हैं
“हमेशा यह देखो कि कहां अच्छा भाव मिल रहा है, क्योंकि मंडी पास या दूर नहीं, दाम ही असली फर्क लाता है।”

तीन साल से लगातार सफलता
पिछले तीन सालों से मिर्च की खेती कर रहे छोटेलाल सिंह अब गांव के दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका मानना है —
“अगर मेहनत और समझदारी से खेती की जाए, तो यही खेती किसान की असली ताकत बन सकती है।”
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