चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में घरेलू उत्पादन घटने के कारण भारत का यूरिया आयात दोगुने से ज्यादा बढ़कर 7.17 मिलियन टन हो गया। यूरिया और डीएपी में आयात पर निर्भरता बढ़ी है, जबकि देसी सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) की बिक्री और उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार आयात और घरेलू उत्पादन दोनों पर ध्यान दे रही है।
देश में किसानों की खाद की जरूरत पूरी करने के लिए भारत का यूरिया आयात तेजी से बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों (अप्रैल–नवंबर) में भारत ने 7.17 मिलियन टन यूरिया आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में दो गुना से ज्यादा है।
घरेलू उत्पादन घटा, आयात बढ़ा
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के आंकड़ों के अनुसार, यूरिया का आयात 120 प्रतिशत बढ़कर 7.17 मिलियन टन हो गया। वहीं, घरेलू यूरिया उत्पादन 3.7 प्रतिशत घटकर 19.75 मिलियन टन रहा। इस दौरान यूरिया की बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 25.40 मिलियन टन हो गई।FAI के चेयरमैन एस. शंकरसुब्रमण्यम ने कहा कि किसानों की मांग पूरी करने के लिए अच्छी योजना से बिक्री तो बढ़ी है, लेकिन यूरिया और डीएपी के लिए आयात पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय है।
नवंबर में आयात में तेज उछाल
सिर्फ नवंबर महीने में ही यूरिया आयात 68 प्रतिशत बढ़कर 1.31 मिलियन टन हो गया। इसी महीने यूरिया की बिक्री भी करीब 5 प्रतिशत बढ़ी।वहीं डीएपी खाद के मामले में भी आयात पर निर्भरता बढ़ी है।कुल डीएपी सप्लाई में आयात की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत हो गई है।घरेलू डीएपी उत्पादन 5.2 प्रतिशत घटकर 2.68 मिलियन टन रहा।हालांकि डीएपी की बिक्री लगभग स्थिर रही।जबकि कॉम्प्लेक्स एनपीके खाद का उत्पादन करीब 14 प्रतिशत बढ़ा है ।
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देसी SSP की मजबूत पकड़
एक अच्छी खबर यह है कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) जैसी देसी खाद पर किसानों का भरोसा बढ़ा है।SSP की बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 4.16 मिलियन टन हो गई। इसका उत्पादन भी करीब 10 प्रतिशत बढ़ा।FAI का कहना है कि इससे साबित होता है कि देश में ही फॉस्फेटिक खाद का उत्पादन मजबूत हो रहा है।
संगठन इसपर ध्यान देगा
FAI के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि आंकड़े दो बातें साफ दिखाते हैं पहला नाइट्रोजन और फॉस्फेट खाद के लिए आयात पर निर्भरता बढ़ रही है। दूसरा देसी SSP जैसी खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। आगे चलकर संगठन बेहतर योजना, आयात-घरेलू उत्पादन में संतुलन और पोषक तत्वों के सही इस्तेमाल पर ध्यान देगा।
आपको बता दें कि यूरिया एक नियंत्रित खाद है और सरकार इसे सब्सिडी देती है। इसकी कीमत 45 किलो की बोरी पर 242 रुपये है, जो 2012 से अब तक नहीं बदली है।
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