केंद्र सरकार ने करीब तीन साल बाद गेहूं के आटे और उससे बने उत्पादों के 5 लाख टन निर्यात को सीमित रूप से मंजूरी दी है। यह निर्यात तय कोटे और लाइसेंस के तहत होगा, जबकि गेहूं के सीधे निर्यात पर रोक जारी रहेगी। अच्छे मानसून और बेहतर पैदावार की उम्मीद के चलते सरकार ने यह फैसला लिया है।
केंद्र सरकार ने करीब तीन साल बाद गेहूं से जुड़े उत्पादों के निर्यात में आंशिक राहत दी है। सरकार ने 5 लाख टन गेहूं का आटा और उससे बने अन्य उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दे दी है। हालांकि, गेहूं के सीधे निर्यात पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह निर्यात एक तय कोटे के तहत ही होगा। यानी तय मात्रा से ज्यादा निर्यात की इजाजत नहीं मिलेगी। इसके लिए कंपनियों को सरकार से अलग-अलग लाइसेंस लेना होगा और उसी के आधार पर निर्यात किया जा सकेगा।
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21 जनवरी से आवेदन शुरू
DGFT ने बताया कि जो भी कंपनियां गेहूं के उत्पादों का निर्यात करना चाहती हैं, उन्हें निदेशालय में आवेदन करना होगा। आवेदन का पहला दौर 21 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक चलेगा। इसके बाद, जब तक तय की गई पूरी मात्रा का आवंटन नहीं हो जाता, हर महीने के आखिरी 10 दिनों में आवेदन मंगाए जाएंगे। एक बार जारी किया गया निर्यात लाइसेंस छह महीने तक मान्य रहेगा।
मई 2022 में लगी थी रोक
आपको बता दें कि देश में गेहूं की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में गेहूं और बाद में उसके उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब हालात कुछ बेहतर नजर आ रहे हैं। अच्छे मानसून, मजबूत बुआई और बेहतर पैदावार की उम्मीद को देखते हुए सरकार ने गेहूं के आटे और प्रोसेस्ड उत्पादों के निर्यात को सीमित मात्रा में फिर से खोलने का फैसला लिया है।
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