भारत में खाद की मांग बढ़ी, इंपोर्ट में 41% की बढ़ोतरी का अनुमान

इंपोर्ट में 41% की बढ़ोतरी का अनुमान

भारत में अच्छी बारिश के कारण खाद की मांग बढ़ गई है, इसलिए 2025-26 में खाद का इंपोर्ट 41% बढ़कर 223 लाख टन होने का अनुमान है। अप्रैल–अक्टूबर में इंपोर्ट 69% बढ़ा। यूरिया, DAP और NPK की खरीद सबसे ज्यादा बढ़ी है। FAI का कहना है कि देश में अभी खाद की कोई कमी नहीं है और अगले 2–3 साल में भारत यूरिया में आत्मनिर्भर हो सकता है। सरकार ने इस साल खाद पर 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी भी दी है।

फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के अनुसार अच्छे मॉनसून की वजह से खेती बढ़ी है और इसके चलते खाद की घरेलू मांग भी तेज़ी से बढ़ी है। इसी कारण 2025-26 में भारत का खाद आयात (इंपोर्ट) 41% बढ़कर 223 लाख टन तक पहुँच सकता है।भारत ने अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच 144 लाख टन खाद इंपोर्ट किया, जबकि पिछले साल यही संख्या 85 लाख टन थी। यानी 69% ज्यादा।

कौन-कौन सी खाद ज्यादा इंपोर्ट होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में यूरिया 80–90 लाख टन (पिछले साल 56 लाख टन), DAP 70 लाख टन (पिछले साल 45 लाख टन) और NPK 33 लाख टन (पिछले साल 22 लाख टन) रहने का अनुमान है।FAI का कहना है कि अच्छी बारिश से मांग अचानक बढ़ गई, इसलिए इंपोर्ट भी बढ़ गया।

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देश में खाद की कमी नहीं
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि नवंबर के अंत तक देश में कुल 102 लाख टन स्टॉक था। जिसमें 50 लाख टन यूरिया, 17 लाख टन DAP और 35 लाख टन NPK शामिल है।FAI का दावा है कि सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है। वहीं एफएआई को उम्मीद है कि अगले 2–3 साल में भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा, क्योंकि देश में बड़ी मात्रा में नई उत्पादन क्षमता विकसित हो रही है।

घरेलू उत्पादन भी बढ़ा
अप्रैल-अक्टूबर में घरेलू फर्टिलाइजर का प्रोडक्शन थोड़ा बढ़कर 299 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 297 लाख टन था।जिसमें 171 लाख टन यूरिया, 23 लाख टन DAP, 70 लाख टन NPK और 34 लाख टन SSP शामिल है। रिपोर्ट में ये बताया गया है कि भारत हर साल करीब 700 लाख टन खाद इस्तेमाल करता है और चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है।

सब्सिडी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
सरकार ने 2024-25 में खाद पर 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी दी। इतना ही नहीं भारत ने खाद की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए सऊदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को, कतर और रूस जैसे देशों से साझेदारी भी की है।

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