कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) 19 जनवरी से 2025–26 सीजन में खरीदे गए कपास की बिक्री शुरू करेगा। अब तक CCI ने करीब 80 लाख गांठ कपास खरीदी है। इंपोर्ट ड्यूटी की छूट खत्म होने और बिनौला के दाम बढ़ने से कपास की कीमतें MSP से ऊपर पहुंच गई हैं। वहीं बेहतर उत्पादन के बावजूद भारी इंपोर्ट के चलते इस सीजन में कपास का आयात रिकॉर्ड 50 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकारी कंपनी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) मौजूदा 2025–26 फसल सीजन में खरीदे गए कपास की बिक्री 19 जनवरी से शुरू करने जा रही है। CCI ने अपनी वेबसाइट पर पूरी तरह प्रेस की गई कपास की गांठों (बेल्स) की बिक्री से जुड़ी शर्तें जारी कर दी हैं, जो अगले हफ्ते से लागू होंगी।
ट्रेड से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, CCI अब तक 170 किलो की करीब 80 लाख गांठ कपास की खरीद कर चुका है। वहीं तेलंगाना, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में खरीद अभी जारी है।
इंपोर्ट ड्यूटी छूट खत्म होने से कीमतों में उछाल
पिछले कुछ हफ्तों में कपास की कीमतों में तेज़ी देखने को मिली है और दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर चले गए हैं। इसकी दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं पहली, बिनौला (कॉटन सीड) के दाम मजबूत होना, और दूसरी, सरकार द्वारा 31 दिसंबर से कपास इंपोर्ट पर ड्यूटी में दी गई छूट को खत्म करना।दरअसल, अगस्त में सरकार ने टेक्सटाइल और स्पिनिंग मिलों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी में अस्थायी छूट दी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
ये भी पढ़ें- टाइमिंग और मात्रा का खेल: बेहतर उत्पादन के लिए कब करना चाहिए गेहूं में NPK स्प्रे?
बिनौला और कपास दोनों महंगे हुए
अंग्रेजी अखबार बिजनेसलाइन के मुताबिक, रायचूर के एक सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने बताया कि पिछले एक महीने में बिनौला के दाम ₹700 प्रति क्विंटल बढ़कर ₹4,300 तक पहुंचे, जो अब थोड़ा घटकर ₹4,100 के आसपास हैं।वहीं कपास के दाम करीब ₹4,000 प्रति कैंडी बढ़कर ₹55,000–56,000 के स्तर पर पहुंच गए हैं। कच्चे कपास के भाव भी ₹7,700 से बढ़कर ₹8,200–8,300 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।उन्होंने कहा कि CCI द्वारा बिक्री शुरू करने की घोषणा के बाद खरीदार अब सरकारी कीमतों का इंतजार कर रहे हैं।
उत्पादन बेहतर, लेकिन इंपोर्ट भी रिकॉर्ड स्तर पर
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अनुसार, महाराष्ट्र और तेलंगाना में उम्मीद से बेहतर उत्पादन हुआ है। इसी वजह से CAI ने 2025–26 के लिए कपास उत्पादन का अनुमान 7.5 लाख गांठ बढ़ाकर 317 लाख गांठ कर दिया है।हालांकि, इसके बावजूद इस सीजन के अंत तक 122.59 लाख गांठ का सरप्लस रहने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह कपास का भारी इंपोर्ट है।
CAI के मुताबिक, मौजूदा सीजन में कपास का इंपोर्ट पिछले साल के 41 लाख गांठ से बढ़कर रिकॉर्ड 50 लाख गांठ तक पहुंच सकता है। 31 दिसंबर तक ही 31 लाख गांठ कपास का इंपोर्ट हो चुका है।
CCI की बिक्री, इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होना और बेहतर उत्पादन, इन सभी कारणों से आने वाले दिनों में कपास बाजार में कीमतों और मांग-आपूर्ति पर खास असर देखने को मिल सकता है।
ये देखें –