2025–26 सीजन में कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अब तक 50 लाख बेल कपास MSP पर खरीदी है, जो पिछले साल से 60% ज्यादा है। इससे कपास के दामों को सहारा मिला है और किसान बाजार के बजाय CCI को कपास बेच रहे हैं। कम रकबा और खराब मौसम के कारण इस साल कपास उत्पादन थोड़ा घटने का अनुमान है।
कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने मौजूदा 2025–26 सीजन में अब तक करीब 50 लाख गांठ (बेल) कपास न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी है। यह खरीद पिछले साल की इसी अवधि (मिड-दिसंबर तक 31 लाख बेल) के मुकाबले करीब 60 प्रतिशत ज्यादा है।CCI के चेयरमैन और एमडी ललित कुमार गुप्ता के मुताबिक, इस सीजन में अब तक 118 लाख बेल कपास मंडियों में आई है, जिसमें से 50 लाख बेल CCI ने खरीदी है। फिलहाल रोज़ाना 2 लाख से ज्यादा बेल की खरीद हो रही है।
खरीद सबसे ज़्यादा तेलंगाना में
19 दिसंबर तक CCI ने कुल 230.23 लाख क्विंटल कपास खरीदी, जिसकी कीमत करीब 18,238 करोड़ रुपये है। सबसे ज्यादा खरीद तेलंगाना और महाराष्ट्र में हुई है। तेलंगाना में 93.87 लाख क्विंटल (₹7,445 करोड़) और महाराष्ट्र में 47.69 लाख क्विंटल (₹3,779 करोड़)।
CCI के मुताबिक कपास की खरीद कर्नाटक में 21.49 लाख क्विंटल (₹1,708 करोड़), गुजरात में 19.23 लाख क्विंटल (₹1,546 करोड़), आंध्र प्रदेश में ₹972 करोड़, राजस्थान में ₹848 करोड़, हरियाणा में ₹484 करोड़, ओडिशा में ₹315 करोड़ और पंजाब में ₹103 करोड़ रुपये की हुई है।
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दाम बढ़कर ₹7,800 प्रति क्विंटल के आसपास
CCI की खरीद से कपास के दामों को सहारा मिला है। सीजन की शुरुआत में कपास के भाव ₹7,200–7,300 प्रति क्विंटल थे, जो अब बढ़कर ₹7,800 प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गए हैं। हालांकि अभी भी दाम MSP से नीचे हैं। सरकार ने 2025–26 के लिए मध्यम रेशा कपास का MSP ₹7,710 प्रति क्विंटल और लंबे रेशा कपास का MSP ₹8,110 प्रति क्विंटल तय किया है।कपास की दबाई (प्रेस्ड कॉटन) के दाम भी बढ़कर करीब ₹54,000 प्रति कैंडी (356 किलो) हो गए हैं। बाजार से ज्यादा दाम मिलने के कारण किसान CCI को कपास बेचने को तरजीह दे रहे हैं।
कम हुआ है कपास की खेती का रकबा
इस साल कपास की खेती का रकबा कम हुआ है और मौसम की मार भी पड़ी है। बेमौसम बारिश से कई राज्यों में कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक 2025–26 में कपास उत्पादन 292.15 लाख बेल रहने की संभावना है, जो पिछले साल से थोड़ा कम है। फिलहाल साल के अंत तक कपास आयात पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाया गया है।
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