आम की फसल

तूफान के बाद आम की फसल को भारी नुकसान, यूपी में आंधी बारिश से चौतरफा तबाही

बागपत से न्यूज़ पोटली के लिए पारस जैन की रिपोर्टबागपत, यूपी। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बुधवार देर शाम को आई अचानक तेज आंधी और तूफान ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। करीब एक घंटे तक चली तेज हवाओं और बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज गति से…

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ढैंचा की खेती

हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, ढैंचा की खेती के लिए प्रति एकड़ 1 हजार रुपये दे रही है सरकार

हरियाणा सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से एक योजना लायी है. इस योजना के तहत अब जो किसान अपनी जमीन पर ढैंचा की खेती करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी.

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खाद्य मंत्रालय

देश में कुल 2278 गोदाम, इसे उन्नत बनाने के लिए 1,280 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार: खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी

खाद्य मंत्रालय गोदामों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का काम करेगी. केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार राज्य के स्वामित्व वाली एफसीआई और केंद्रीय भंडारण निगम के गोदामों के मौजूदा गोदामों के बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने के लिए लगभग 1,280 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. पीडीएस में सुधार के लिए तीन मोबाइल एप्लिकेशन- डिपो दर्पण, अन्न मित्र और अन्न सहायता भी लॉन्च किए हैं. जोशी ने कहा कि ये तीन ऐप लीकेज को रोकने और बर्बादी को कम करने में मदद करेंगे.

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चाय की खेती

भारत में चाय की खेती, उत्पादन और निर्यात पर एक नजर

चाय, दुनिया में पानी के बाद दूसरा सबसे ज़्यादा पिया जाने वाला पेय पदार्थ है। भारत में कई करोड़ों लोगों की सुबह की शुरुआत चाय की चुस्कियों के साथ होती है। बहुत लोगों की शाम भी चाय के बिना अधूरी होती है। मतलब हम भारतीयों की जीवन में चाय का अहम स्थान है। उत्पादन की बात करें तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। भारत के उत्तर पूर्वी भाग में सबसे अधिक चाय का उत्पादन होता है। इतना ही नहीं भारत दुनिया के सर्वाधिक चाय खपत करने वाले देशों में से एक है। इसके अलावा चाय भारत के नकदी फसलों में से भी एक है।पहाड़ी और आर्थिक पिछड़े इलाकों में चाय की खेती लोगों के लिए रोजगार का स्रोत भी है।

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शिवराज सिंह चौहान

2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लिए कृषि में 5% वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता, जानिए अभी कितनी है वार्षिक वृद्धि दर?

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को 2047 तक विकास के लिए कृषि में 5% वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता है। खाद्यान्न वृद्धि वर्तमान में 1.5% है। इस वृद्धि को प्राप्त करने में कृषि संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि निर्यात को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। कृषि अनुसंधान में निवेश को 1% तक बढ़ाया जाना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों और जर्म प्लाज्म का बेहतर उपयोग आवश्यक है।

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सरकारी गेहूं खरीद 290 लाख टन के पार, कुल खरीद 320-325 लाख टन होने का अनुमान

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने घोषणा की कि इस साल गेहूं की खरीद 290 लाख टन से अधिक हो गई है। रिकॉर्ड उत्पादन के कारण सरकार को 320-325 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। अगले विपणन वर्ष के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 312 लाख टन है। सरकार स्टॉक के स्तर का आकलन करने के बाद गेहूं के निर्यात पर विचार करेगी। पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने पिछले साल की तुलना में अधिक गेहूं खरीदा।

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FSSAI

FSSAI ने दिए सख्त निर्देश…फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे एजेंट का इस्तेमाल करने वालों पर होगी कार्रवाई

FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और FSSAI के क्षेत्रीय निदेशकों से अनुरोध किया गया है कि वे फलों के बाजारों और मंडियों पर कड़ी निगरानी रखें, ताकि कैल्शियम कार्बाइड जैसे एजेंटों का उपयोग करके फलों को पकाने के अवैध प्रयोग को रोका जा सके.

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मधुमक्खी

मधुमक्खी परागण से फसल की पैदावार औसतन 20-30% तक बढ़ सकती है, उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में भी सहायक 

विश्व मधुमक्खी दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है जो आज के दिन, 20 मई को पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और जैवविविधता के के लिए मधुमक्खियों और अन्य pollinators के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये मनाया जाता है। स्लोवेनिया के आधुनिक मधुमक्खी पालन के अग्रदूत एंटोन जानसा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में इस तारीख को चुना गया था। स्लोवेनिया के एक प्रस्ताव और 115 देशों के समर्थन के बाद UN  ने वर्ष 2017 में विश्व मधुमक्खी दिवस घोषित किया।

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धान की सीधी बुवाई

धान की सीधी बुवाई कैसे करें? बुवाई का सही समय और खेत की तैयारी समझें

धान की सीधी बुवाई एक ऐसी तकनीक है, जिसमें धान की रोपाई न करके मशीन के द्वारा सीधे खेत में बुवाई की जाती है। धान की सीधी बुवाई से न के वल श्रम लागत में कमी आती है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है, जैसे मीथेन गैस उत्सर्जन में कमी। साथ ही, फसल 7-10 दिन जल्दी पकने से किसान अगली फसल की तैयारी समय पर कर सकते हैं, जिससे फसल-प्रणाली के उत्पादन में सुधार होता है।

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शिवराज सिंह चौहान

उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ एक बहुत बड़ा प्रयास– कृषि मंत्री चौहान

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ एक बहुत बड़ा प्रयास है। यह देश अपना है, माटी अपनी है, किसान अपने हैं, हमारा उद्देश्य किसानों की खेती को फायदे में बदलना, खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, अनाज, दालें, फल, सब्जियों उनके भंडार भरना और पोषणयुक्त आहार देश की जनता को उपलब्ध कराना है। ये बातें शिवराज सिंह चौहान ने वर्चुअल मीटिंग में राज्यों के कृषि मंत्रियों से कही।

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