श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास अनुसंधान में अहम योगदान देने वाले श्रीरंग देवबा लाड को पद्मश्री

कपास खेती में नवाचार कर किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ाने वाले महाराष्ट्र के कृषि विशेषज्ञ श्रीरंग देवबा लाड को साल 2026 के पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। ‘कृषि ऋषि’ के नाम से मशहूर लाड का कहना है कि यह सम्मान उनके लिए निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि किसानों तक तकनीक और ज्ञान पहुंचाने की नई प्रेरणा है।

पूरी र‍िपोर्ट
मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

बीज संरक्षण को बनाया जीवन का मिशन, मुरादाबाद के रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को पारंपरिक सब्जियों के विलुप्त होते बीजों के संरक्षण और उन्हें फिर से किसानों तक पहुंचाने के असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की है। रघुपत सिंह ने बीज संरक्षण को अपने जीवन का मिशन बनाया और 55 से अधिक विलुप्त सब्जियों के बीज बचाकर तीन लाख से ज्यादा किसानों को उनसे जोड़ा।

पूरी र‍िपोर्ट
डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म सम्मान

गाजीपुर से पूसा तक: बासमती को नई पहचान दिलाने वाले डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म सम्मान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा में पूसा के पूर्व निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह समेत 5 कृषि वैज्ञानिक और 4 किसानों को सम्मानित करने का ऐलान हुआ है। डॉ. सिंह ने बासमती धान की रोगरोधी और हर्बिसाइड टॉलरेंट किस्में विकसित कर भारतीय बासमती चावल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान दिलाई।

पूरी र‍िपोर्ट
पद्म पुरस्कार 2026

पद्म पुरस्कार 2026: किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी की गई, जिसमें देशभर के 45 गुमनाम नायकों को सम्मानित किया गया है। इस साल कुल 131 पद्म पुरस्कार दिए जाएंगे। कृषि क्षेत्र से जुड़े 5 कृषि वैज्ञानिकों और 4 किसानों को भी पद्म सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, असम, तेलंगाना और महाराष्ट्र के किसान शामिल हैं। यह सूची ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के योगदान को पहचान देने पर ज़ोर देती है।

पूरी र‍िपोर्ट
अरहर की खेती में छोटा बदलाव

अरहर की खेती में छोटा बदलाव, 20% तक बढ़ेगी पैदावार

इक्रिसैट के अनुसार अरहर (तूर) की खेती में अगर सीधे बुवाई की बजाय नर्सरी में पौधे तैयार कर रोपाई की जाए, तो पैदावार करीब 20% तक बढ़ सकती है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2.5 टन से बढ़कर लगभग 3 टन हो जाता है। यह तरीका पौधों को मजबूत बनाता है, फसल की अवधि 12–18 दिन कम करता है और अनियमित बारिश व सूखे के खतरे को घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है।

पूरी र‍िपोर्ट
सिगरेट टैक्स बढ़ोतरी से किसान परेशान

नीलामी पर संकट, FCV तंबाकू किसानों ने सरकार को बताई परेशानी

एफसीवी तंबाकू किसानों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर कानूनी सिगरेट पर टैक्स कम करने की मांग की। किसानों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से खपत घटेगी, दाम गिरेंगे और नीलामी प्रणाली प्रभावित होगी, जिससे किसानों को नुकसान होगा। वित्त मंत्री ने किसानों की चिंताओं पर विचार करने और रेवेन्यू न्यूट्रल रुख अपनाने का आश्वासन दिया है।

पूरी र‍िपोर्ट
MSP

कर्नाटक में 1.01 लाख टन चना MSP पर खरीदेगा केंद्र

केंद्र सरकार ने कर्नाटक में रबी 2026–27 सीजन के लिए 1.01 लाख टन चना MSP पर खरीदने की मंजूरी दी है, जिसका MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार से पूरी मात्रा की खरीद सुनिश्चित करने को कहा और पिछली फसलों की अधूरी खरीद पर नाराज़गी जताई। वहीं, देश में इस रबी सीजन में चना की खेती का रकबा 5 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक आगे हैं।

पूरी र‍िपोर्ट
SAP पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी मंजूर

पंजाब में गन्ना किसानों को बड़ी राहत, SAP पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी मंजूर

पंजाब मंत्रिमंडल ने गन्ना किसानों के लिए एसएपी पर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी को मंजूरी दी है, जिससे राज्य देश में गन्ने की सबसे ऊंची कीमत देने वाला बन गया है। इसके साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के साथ मिलकर बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने का फैसला किया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके।

पूरी र‍िपोर्ट
नकली कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाम की मांग

नकली कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर लगाम की मांग, सरकार से उद्योग की अपील

कीटनाशक उद्योग ने सरकार से मांग की है कि पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल, 2025 में ऐसे सख्त और स्पष्ट नियम हों, जिससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नकली कीटनाशकों की बिक्री रोकी जा सके। उद्योग का कहना है कि बिना लाइसेंस गोदामों और कमजोर निगरानी के कारण किसानों तक नकली उत्पाद पहुंच रहे हैं, जो फसल और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। यह मांग मुनाफे से ज्यादा किसानों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उत्पादों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

पूरी र‍िपोर्ट
ई-रेडिएशन सेंटर से बढ़ा निर्यात और रोजगार

किसानों से लेकर महिलाओं तक को फायदा, ई-रेडिएशन सेंटर से बढ़ा निर्यात और रोजगार

पटना के बिहटा में बने बिहार के पहले ई-रेडिएशन सेंटर से राज्य के फल-सब्जियों के निर्यात को नई रफ्तार मिली है। इस तकनीक से आम, लीची, केला, मखाना और आलू जैसे कृषि उत्पाद बैक्टीरिया और कीटों से मुक्त होकर 3 से 6 महीने, कुछ मामलों में एक साल तक सुरक्षित रह सकते हैं। इससे बिहार के उत्पाद अब सीधे खाड़ी देशों, जापान और नेपाल जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच रहे हैं। इस पहल से किसानों को बेहतर दाम, निर्यात में नुकसान कम और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

पूरी र‍िपोर्ट