नैनो-कॉम्प्लेक्स खाद

IFFCO के नैनो-कॉम्प्लेक्स खाद पर अभी फैसला बाकी, किसानों को करना पड़ सकता है इंतजार

IFFCO के नए नैनो-कॉम्प्लेक्स (दानेदार) फर्टिलाइज़र की मंजूरी पर अभी फैसला नहीं हुआ है, जिससे इसके लॉन्च में देरी हो सकती है। कंपनी को उम्मीद है कि किसान इसका इस्तेमाल रबी 2026 या खरीफ 2027 से कर पाएंगे। IFFCO का मानना है कि स्थायी मंजूरी मिलने से खाद की खपत घटेगी, सब्सिडी बचेगी और किसानों को बड़ा फायदा होगा।

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मुख्यमंत्री योगी

खेती की बात अब सचिवालय में नहीं, सीधे खेत पर होगी: मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में किसान पाठशाला के शुभारंभ पर किसानों से तकनीक आधारित खेती अपनाने और रासायनिक खाद का सीमित उपयोग करने की अपील की। सरकार पूर्वी यूपी के 28 जिलों में खेती को लाभकारी बनाने के लिए 4000 करोड़ रुपये के बजट से योजनाएं चला रही है। सीएम ने बताया कि लखनऊ के चौधरी चरण सिंह पार्क को विश्व स्तरीय कृषि विज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

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पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं?

पाला और शीतलहर से फसल कैसे बचाएं? किसानों के लिए जरूरी सलाह

दिसंबर से जनवरी के बीच पाला और शीतलहर रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखें, संतुलित खाद का उपयोग करें, कीट-रोगों की निगरानी करें और पुआल या घास से मल्चिंग करें। गेहूं, सरसों, दलहन, सब्ज़ी, बागवानी फसलों और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए समय पर सिंचाई, उचित दवा और वैज्ञानिक सलाह लेकर ही उपाय अपनाने की जरूरत है।

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(FPO) योजना

FPOs को मजबूत करने के लिए योजना का विस्तार जरूरी: कृषि सचिव

केंद्र सरकार किसान उत्पादक संगठन (FPO) योजना को 2026 से 2031 तक बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य FPOs को मजबूत बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण, पूंजी और नियमों में राहत देना है। अब तक बने 10,000 FPOs ने करीब 9,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया है और 52 लाख किसानों को जोड़ा है। सरकार वर्किंग कैपिटल बढ़ाने, नैनो-स्तर की सहायता और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर भी काम कर रही है।

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बाराबंकी किसान पाठशाला में बोले IFFCO चेयरमैन संघाणी

‘नैनो यूरिया ही टिकाऊ खेती का भविष्य’, बाराबंकी किसान पाठशाला में बोले IFFCO चेयरमैन दिलीप संघाणी

IFFCO चेयरमैन दिलीप संघाणी ने बाराबंकी की किसान पाठशाला में नैनो यूरिया को खेती का भविष्य बताया। संघानी ने बताया कि यूरिया के दुष्प्रभाव से बचने और सब्सिडी खर्च कम करने के लिए इफको ने नैनो यूरिया विकसित किया, जो अब किसानों और मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है।

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बाराबंकी

बाराबंकी से शुरू हुई योगी सरकार की किसान पाठशाला, सीएम बोले लागत घटाओ, उत्पादन बढ़ाओ

यूपी सरकार ने किसान पाठशाला की शुरुआत बाराबंकी से की। सीएम योगी ने किसानों को लागत कम करके उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी और बताया कि यूपी एथेनॉल व फल–सब्ज़ी उत्पादन में देश में नंबर-1 है। पद्मश्री रामशरण वर्मा ने बताया कि उन्नत खेती और सरकारी मदद से उनकी खेती 6 एकड़ से 275 एकड़ हुई। कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती अपनाने और कम खाद उपयोग की अपील की।

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महाराष्ट्र और कर्नाटक

महाराष्ट्र और कर्नाटक में बढ़ता किसान संकट, आत्महत्याओं के आंकड़े चिंताजनक

महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों राज्यों में किसान आत्महत्याओं की स्थिति बेहद गंभीर है। महाराष्ट्र में जनवरी–सितंबर 2025 के बीच 781 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि कर्नाटक में नवंबर 2025 तक 377 मामले दर्ज हुए। दोनों ही जगह आत्महत्याओं की बड़ी वजह कर्ज़, फसल नुकसान और मौसम है।

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Nano-fertilizer

Nano-fertilizer को स्थायी मंजूरी देने की तैयारी में सरकार

सरकार नैनो-फर्टिलाइज़र को स्थायी मंजूरी देने की तैयारी कर रही है, लेकिन उससे पहले सभी परीक्षण रिपोर्टों की गहरी जांच होगी। कंपनियों को टैगिंग रोकने की चेतावनी दी गई है। ICAR के अध्ययन में नैनो यूरिया के मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं। कुछ जगह उपज घटी तो कुछ जगह 5–15% बढ़ी।

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इथेनॉल प्लांट

राजस्थान में इथेनॉल प्लांट को लेकर बवाल, किसानों का विरोध हुआ हिंसक

राजस्थान के हनुमानगढ़ में इथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में किसानों की महापंचायत हिंसक हो गई। किसानों ने फैक्ट्री में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की, जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। किसान प्लांट से प्रदूषण और खेती को नुकसान होने का आरोप लगाकर इसे दूसरी जगह ले जाने की मांग कर रहे हैं। इलाके में धारा 144 और इंटरनेट बंद है।

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भारत का चाय निर्यात बढ़ा

भारत का चाय निर्यात बढ़ा, उत्पादन पर मौसम का असर

जनवरी-अक्टूबर 2025 में भारत का चाय निर्यात 6.47% बढ़कर 228.52 मिलियन किलो हुआ, मूल्य ₹6882.91 करोड़ रहा और औसत कीमत ₹301.20 प्रति किलो। उत्तरी भारत से निर्यात बढ़ा, दक्षिणी भारत से घटा, जबकि खराब मौसम के कारण उत्पादन 21% घटकर 161.93 मिलियन किलो रहा।

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