कृषि में ड्रोन को बढ़ावा

कृषि ड्रोन पर 141.39 करोड़ रुपये खर्च, मिट्टी की सेहत सुधारने पर काम कर रही सरकार

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण समाप्त होने को है, इस बीच कृषि में ड्रोन के इस्तेमाल से जुड़े सवाल के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग किसानों द्वारा किसान ड्रोन अपनाने को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) के तहत, 2021-22 से 31 मार्च, 2025 तक, किसान ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए 141.39 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई।

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सरसों की समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद

राजस्थान के किसान अब 40 क्विंटल तक सरसों MSP पर बेच सकेंगे, 10 अप्रैल से शुरू होगी खरीद

राजस्थान के किसानों के लिए अच्छी खबर है. राज्य सरकार ने अब सरसों की समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद की सीमा को 25 से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति किसान कर दिया है. इसी तरह डिग्गी निर्माण के लिये पूर्व में समय सीमा 31 मार्च 2025 थी, जिसे बढ़ाकर 30 जून 2025 तक कर दिया गया है. दोनों ही आदेश सरकार की ओर से जारी कर दिये गये हैं. इससे सरसों उत्पादक किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने पर अधिक फायदा होगा.

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हाइड्रोपोनिक तकनीक

Hydroponic खेती क्या है, कैसे की जाती है, इसके लाभ क्या हैं ?

हाइड्रोपोनिक तकनीक भारत में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है और किसानों को भी आकर्षित कर रही है. यह एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से बिना मिट्टी के ही सब्जियों को उगाया जाता है. यानी इस प्रकार की तकनीक के जरिये खेती करने के लिए मिट्टी की ज़रूरत नहीं होती है. इसके जरिये बिना मिट्टी का इस्तेमाल किए आधुनिक तरीके से खेती की जा सकती है. इस प्रकार की खेती केवल पानी या पानी के साथ बालू और कंकड़ में की जाती है.

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चपाता मिर्च

प्राकृतिक लाल रंग वाले वारंगल के ‘टमाटर मिर्च’ को मिला GI टैग

प्राकृतिक लाल रंग के गुणों वाली वारंगल चपाता मिर्च को जीआई टैग मिला यह मान्यता तेलंगाना का 18वां जीआई रजिस्ट्रेशन है तथा बागवानी उत्पाद के लिए यह पहला रजिस्ट्रेशन है। मध्य तेलंगाना के कृषि जलवायु क्षेत्र में उगाई जाने वाली एक विशिष्ट किस्म वारंगल चपाता मिर्च को भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग से सम्मानित किया गया है। स्थानीय रूप से इसे “टमाटर मिर्च” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसकी आकृति टमाटर जैसी होती है।

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असम के चाय

असम के चाय किसानों के लिए खुशखबरी, केंद्र की मदद से किसान 5% चाय बागानों पर करेंगे ऑयल पाम की खेती

केंद्र सरकार ने असम के चाय बागानों को अपने प्रमुख ऑयल पाम मिशन का लाभ उठाने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय उत्तर-पूर्वी चाय संघ के अनुरोध के बाद लिया गया है। उत्तर-पूर्वी चाय संघ ने 4 फरवरी 2025 को केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखकर असम के चाय बागानों को इस योजना के दायरे में लाने की अपील की थी। आपको बता दें कि भारत खाद्य तेलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में NMEO-OP मिशन से स्वदेशी खाद्य तेल उत्पादन बढ़ाने और आयात खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।

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बिहार सरकार

बिहार सरकार स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट समेत इन फलों की खेती के लिए दे रही सब्सिडी

बिहार सरकार राज्य के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. राज्य सरकार अनाज उत्पादन के साथ ही फल, फूल और सब्ज़ियों की खेती को भी बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को आर्थिक मदद करके प्रोत्साहित कर रही है. इसी क्रम में राज्य में क्लस्टर में बागवानी योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत किसानों को फलों के पौधे और पेड़ लगाने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है. इस योजना के तहत गांव में न्यूनतम 25 एकड़ में बागवानी फसल के लिए सब्सिडी दिया जाएगा.

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सहफसली खेती

कम जमीन वाले किसानों के लिए वरदान है सहफसली खेती, जानिए केले की फसल के साथ किस फसल की करें खेती

सहफसली खेती का मतलब है एक ही खेत में एक साथ दो या अधिक फसलें उगाना. इसमें मुख्य फसल की पंक्तियों के बीच जल्दी बढ़ने और पकने वाली सहफसलें बोई जाती हैं. रबी या खरीफ के मौसम में मुख्य फसलों के साथ सहफसलें लगाने से न केवल कुल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है.

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केले की फसल में Crop Cover क्यों जरूरी?

केला एक ऐसा फल है जो पूरे साल उपलब्ध रहता है। केला अपने अच्छे स्वाद और ज़्यादा महंगा न होने की वजह से सभी को पसंद होता है। हमारे यहाँ तो केले के पौध की पूजा की जाती है शायद यही कारण है कि आपको केले की फसल लगभग हर राज्य में देखने को मिल जाएगी लेकिन ज़्यादा उत्पादन की बात करें तो कुछ ही प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। केले की खेती में किसान अगर कुछ बातों का ध्यान रखें तो अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। जिनमें पौध की क्वालिटी, खेत की तैयारी और पौधों की देख भाल हैं।

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अच्छी पैदावार के लिए 10 अप्रैल तक कर सकते हैं गन्ने की बुवाई, किसान इन बातों का भी रखें ध्यान

जिन किसानों ने अभी तक गन्ना नहीं बोया है और बोना चाहते हैं लेकिन उन्हें लगता है कि समय निकल गया है तो ऐसा नहीं है, आपके पास अभी भी समय है। उत्तर प्रदेश के धुरंधर गन्ना किसान अमर सिंह कहते हैं कि गन्ना बोने का सबसे उपयुक्त समय 15 मार्च से 10 अप्रैल तक है। वो करीब 40 एकड़ में जूस वाले गन्ने की खेती करते हैं। वो अपने तरीके से खेती करके प्रति एकड़ 600-800 क्विंटल की पैदावार लेते हैं।किसान अमर सिंह ने किसानों से समय पर बुवाई के अलावा अच्छी उपज लेने के लिए खेत की तैयारी, बीज की किस्म आदि बातों पर ध्यान देने को कहा है।

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मखाना बोर्ड के गठन से किसानों को मिलेगा लाभ, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा

बिहार के उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों के साथ मखाना बोर्ड के गठन की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मखाना बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से बात की जाएगी। मंत्री ने कहा कि मखाना बोर्ड के बजट का 50% हिस्सा मखाना उत्पादन से जुड़े घटकों के लिए उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य में मखाना की खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों को लाभ तो होगा ही साथ-साथ मखाना उद्योग का पूरा इकोसिस्टम भी मजबूत होगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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