मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में सोयाबीन पर लागू होगी भावांतर योजना

मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन पर भावांतर योजना लागू करने का ऐलान किया है। किसानों को मंडी भाव और MSP के बीच का अंतर सरकार देगी। MSP ₹5,328 है जबकि मंडियों में औसत भाव ₹4,100 के आसपास है। किसान नेता केदार सिरोही ने योजना पर आपत्ति जताई और 2017 के अनुभव याद दिलाए, जब किसानों को पूरा लाभ नहीं मिला और दाम गिर गए थे। उन्होंने मांग की है कि सरकार किसानों की राय लेकर सीधे MSP पर खरीद सुनिश्चित करे।

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पंजाब

पंजाब के कपास किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, CCI से तुरंत खरीद की मांग

पंजाब के कपास किसानों को CCI की खरीद शुरू न होने से MSP से कम दाम में फसल बेचने की मजबूरी है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि केंद्र के वादे खोखले साबित हो रहे हैं। इस साल पंजाब में कपास का क्षेत्रफल 20% बढ़ा है। मंत्री ने CCI से तुरंत मंडियों में खरीद शुरू करने और किसानों का भरोसा बनाए रखने की मांग की है।

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क्यों घट रही है यूरिया की आपूर्ति?

किसानों की सबसे बड़ी जरूरत पर संकट: क्यों घट रही है यूरिया की आपूर्ति?

खरीफ सीजन में कई राज्यों में यूरिया की किल्लत है। ज्यादा बारिश से बढ़ा उपयोग, वैश्विक दाम और चीन का निर्यात प्रतिबंध इसकी वजह बने। केंद्र अतिरिक्त आवंटन का दावा कर रहा है, पर राज्यों को कमी महसूस हो रही है। किसान परेशान हैं और नैनो यूरिया को विकल्प मानने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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पराली जलाने के सीजन की शुरुआत

पराली जलाने के सीजन की शुरुआत: पहले हफ्ते में 64 मामले दर्ज, पंजाब सबसे आगे

पराली जलाने के सीज़न के पहले हफ़्ते में 64 मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल से 15% कम हैं। इनमें सबसे ज्यादा 56 मामले पंजाब से आए। पिछले पूरे सीज़न में घटनाएं 34% घटी थीं। सरकार जागरूकता अभियान और मशीनरी उपलब्ध करा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने किसानों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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उत्तर प्रदेश और गुजरात

उपज खरीद को लेकर बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश और गुजरात में उड़द, तूर, मूंग, मूंगफली, तिल और सोयाबीन की खरीद को मंजूरी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश और गुजरात में किसानों की उपज खरीद को मंजूरी दी है। यूपी में उड़द, तूर, मूंग, तिल और मूंगफली, जबकि गुजरात में सोयाबीन, मूंग, मूंगफली और उड़द खरीदी जाएगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी ताकि बिचौलिए लाभ न उठा सकें और भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में हो। कुल 13,890.60 करोड़ रुपये की इस खरीदी से दोनों राज्यों के लाखों किसानों को फायदा होगा।

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खरीफ सीजन 2025

खरीफ सीजन 2025: बुवाई में मक्का की बढ़त, धान और तेलहन प्रभावित

इस साल मॉनसून जल्दी शुरू होने के बावजूद खरीफ फसलों की बुवाई में मिश्रित परिणाम रहे। मक्का और मोटे अनाज की बुवाई बढ़ी, जबकि धान, दालें, तेलहन और कपास के क्षेत्र में या तो स्थिरता रही या कमी दर्ज हुई। कुल मिलाकर, किसानों ने मक्का और टिकाऊ फसलों पर ज्यादा भरोसा किया।

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बिहार

मखाना बोर्ड गठन: बिहार के मखाना किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद

केंद्र सरकार ने बिहार में मखाना बोर्ड का गठन किया है, जिससे लगभग पांच लाख किसानों को लाभ मिलेगा। इससे मखाना उत्पादन, प्रोसेसिंग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। पिछले सालों में उत्पादन का क्षेत्र 13,000 से 35,224 हेक्टेयर तक बढ़ा है और राजस्व भी 3.83 करोड़ से 17.52 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। बोर्ड से किसानों की आय और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे।

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हरियाणा

हरियाणा सरकार ने गेहूं के प्रमाणित बीज पर सब्सिडी बढ़ाई

हरियाणा सरकार ने गेहूं के प्रमाणित बीज पर सब्सिडी 1000 से बढ़ाकर 1075 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। सरकारी एजेंसियों के माध्यम से बीज पूरे राज्य में किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से उच्च गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग बढ़ेगा, लागत कम होगी और किसानों की कुल आय में सुधार होगा।

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कृषि और डेयरी सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।

कृषि और डेयरी सेक्टर को राहत, जीएसटी 2.0 सुधार लागू

आज 22 सितंबर से लागू जीएसटी 2.0 सुधारों से कृषि और डेयरी सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। उर्वरक, जैव-कीटनाशक और कृषि उपकरणों पर जीएसटी घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी। डेयरी उत्पादों पर भी टैक्स घटाकर 0-5% कर दिया गया है, जिससे करीब 8 करोड़ किसानों और 19 लाख करोड़ रुपये के डेयरी उद्योग को सीधा लाभ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से किसानों को राहत, उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर पोषण और उद्योग को विकास की नई गति मिलेगी।

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ICAR की सलाह

ICAR की सलाह: दीमक, सफेद मक्खी और कीटों से फसलों की सुरक्षा के लिए तुरंत करें ये उपाय

ICAR ने किसानों को चेतावनी दी है कि मौजूदा मौसम में दीमक, सफेद मक्खी, चूसक कीट और अन्य कीटों का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कीट दिखते ही तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है। क्लोरपाइरीफॉस और इमिडाक्लोप्रिड जैसी दवाओं के सही अनुपात में छिड़काव, फीरोमोन ट्रैप का उपयोग और विषाणु रोग प्रभावित पौधों को हटाना प्रभावी उपाय हैं। नियमित निगरानी और समय पर दवा का इस्तेमाल फसल की सुरक्षा, उपज और गुणवत्ता बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका है।

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