एपीडा और IBEF मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘इंडियन काजू’ ब्रांड को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका लक्ष्य भुने, फ्लेवर और अन्य वैल्यू-ऐडेड काजू उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर बेहतर कीमत हासिल करना है। नए फ्री ट्रेड समझौतों से कई देशों में शून्य शुल्क पर निर्यात के मौके मिले हैं, जिससे भारत का काजू उद्योग वैश्विक बाजार में और मजबूत हो सकता है।
एपीडा (APEDA) और इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘इंडियन काजू’ ब्रांड को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका मकसद काजू के साधारण निर्यात के बजाय भुने, नमकीन, फ्लेवर वाले और अन्य प्रोसेस्ड काजू जैसे वैल्यू-ऐडेड उत्पादों का निर्यात बढ़ाना है, ताकि ज्यादा कीमत मिले और भारत की पहचान प्रीमियम काजू के रूप में मजबूत हो।
FTA से कई नए बाजार खुले
कोल्लम में आयोजित एक बैठक में एपीडा अधिकारियों ने निर्यातकों को बताया कि हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से कई नए बाजार खुले हैं। अब ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, ईएफटीए देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन) और यूरोपीय संघ में शून्य शुल्क पर काजू निर्यात किया जा सकता है। अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा भी तैयार हो चुका है।
बैठक का उद्देश्य?
बैठक का उद्देश्य केरल में काजू उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात को टिकाऊ तरीके से बढ़ाने की योजना बनाना था, जिसमें वैल्यू एडिशन पर खास जोर दिया गया। एपीडा ने भरोसा दिलाया कि वह इन्फ्रास्ट्रक्चर, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, तकनीकी आधुनिकीकरण और नए बाजारों में विस्तार के लिए सहयोग करेगा।
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सरकार भी दे रही है बढ़ावा
केरल सरकार ने भी काजू की खेती बढ़ाने और प्रोसेसिंग यूनिट्स को आधुनिक बनाने पर जोर दिया, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहे। इस कार्यक्रम में करीब 75 निर्यातक, प्रोसेसर और किसान शामिल हुए।
काजू उत्पादन में तीसरे स्थान पर
आपको बता दें कि भारत दुनिया में काजू उत्पादन में तीसरे स्थान पर है और कुल वैश्विक उत्पादन में करीब 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वित्त वर्ष 2024–25 में देश का कुल काजू उत्पादन 8.02 लाख टन रहा, जिसमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सबसे आगे रहे, जबकि केरल छठे स्थान पर है।
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