टिश्यू कल्चर तकनीक का कमाल, बिहार में केले के रकबे में 58 प्रतिशत और उत्पादन में 261 प्रतिशत का उछाल

टिश्यू कल्चर तकनीक

टिश्यू कल्चर तकनीक एक वैज्ञानिक विधि है, जिसमें पौधों के टिश्यू को इस्तेमाल कर लैब में पोषक माध्यम से नए पौध उगाए जाते हैं. इससे रोगमुक्त और ज्यादा उपज देने वाले पौधे मिलते हैं.

पटना। बिहार ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों के सहारे बड़ा कदम बढ़ाया है. राज्य में टिश्यू कल्चर तकनीक के जरिए केले की खेती में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2004-05 में जहां कुल उत्पादन 5.45 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 19.68 लाख मीट्रिक टन हो गया है.

इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार के कृषि रोड मैप और टिश्यू कल्चर से तैयार जी-9, मालभोग और चीनिया जैसे रोगमुक्त व उच्च उपज देने वाले strains को दिया जा रहा है. इन पौधों ने उत्पादकता में जबरदस्त उछाल लाया है, जिससे किसानों की आय भी बढ़ी है.

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प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़कर 45 मीट्रिक टन हो गई
वर्ष 2004-05 में जहां 27,200 हेक्टेयर में केले की खेती होती थी, वह 2022-23 में बढ़कर 42,900 हेक्टेयर हो गई. इसी अवधि में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 20 मीट्रिक टन से बढ़कर 45 मीट्रिक टन हो गई. इस प्रकार राज्य में केले के रकबे में 58 प्रतिशत, उत्पादन में 261 प्रतिशत और उत्पादकता में 125 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

केला की खेती पर 50% का अनुदान
बिहार सरकार की फल विकास योजना के तहत टिश्यू कल्चर केला की खेती पर 50% अनुदान (62,500 रुपये प्रति हेक्टेयर) दिया जाता है. वर्ष 2024-25 में 3,624 किसानों ने इस योजना से लाभ उठाया है.

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