IFFCO के नए नैनो-कॉम्प्लेक्स (दानेदार) फर्टिलाइज़र की मंजूरी पर अभी फैसला नहीं हुआ है, जिससे इसके लॉन्च में देरी हो सकती है। कंपनी को उम्मीद है कि किसान इसका इस्तेमाल रबी 2026 या खरीफ 2027 से कर पाएंगे। IFFCO का मानना है कि स्थायी मंजूरी मिलने से खाद की खपत घटेगी, सब्सिडी बचेगी और किसानों को बड़ा फायदा होगा।
इफको (IFFCO) ने अक्टूबर में अपने नए नैनो-कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइज़र (दानेदार रूप में NPK) को मंजूरी दिलाने के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी यह तय नहीं हो पाया है कि इसे तीन साल की अस्थायी मंजूरी दी जाए या फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत स्थायी लाइसेंस मिले। कृषि मंत्रालय के फैसले तक IFFCO और किसानों दोनों को इंतजार करना होगा।
मंजूरी का है इंतजार
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार कंपनिय का कहना है कि बार-बार तीन साल की अस्थायी मंजूरी से अनिश्चितता बनी रहती है। नैनो फर्टिलाइजर बनाने में बड़ा निवेश किया गया है, इसलिए निर्माता स्थायी मंजूरी चाहते हैं। वहीं, कुछ किसान इस नई तकनीक को अपनाने को लेकर अभी भी सशंकित हैं, जिससे इसे बड़े स्तर पर पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।
IFFCO के मैनेजिंग डायरेक्टर के. जे. पटेल के मुताबिक, जरूरी परीक्षण पूरे हो चुके हैं और अब कमर्शियल लॉन्च से पहले कोऑपरेटिव की मंजूरी का इंतजार है। उन्हें उम्मीद है कि किसान इस नैनो-कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का इस्तेमाल रबी 2026 या खरीफ 2027 से कर पाएंगे।
50 किलो वाले कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का काम अब 5 किलो में
यह नैनो-कॉम्प्लेक्स खाद बोतल में नहीं, बल्कि 5 किलो के बैग में आएगा, जो पारंपरिक 50 किलो वाले कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर के बराबर असरदार होगा। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर फसलों की ज़रूरत के हिसाब से मिलाए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह खाद पारंपरिक खाद जितनी कारगर साबित होती है, तो देश में कुल खाद की खपत घटेगी और सरकार को आयात व सब्सिडी पर खर्च कम करना पड़ेगा।
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IFFCO का भरोसा
IFFCO पहले ही सालाना करीब 29 करोड़ बोतल नैनो-यूरिया और नैनो-DAP बनाने की क्षमता तैयार कर चुका है। हालांकि, पिछले वित्त वर्ष में बिक्री सिर्फ 3.5 करोड़ बोतलों की रही, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाया। IFFCO को भरोसा है कि जैसे-जैसे किसानों में जागरूकता बढ़ेगी और गलतफहमियां दूर होंगी, बिक्री में तेज़ बढ़ोतरी होगी।
IFFCO और ICAR मिलकर कर रहे हैं काम
नैनो फर्टिलाइजर को लेकर फैली शंकाओं को दूर करने के लिए IFFCO और ICAR मिलकर अगले पांच सालों में देश के अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के 25 केंद्रों पर इसके असर की दोबारा जांच करेंगे। बताया गया है कि IFFCO अब तक नैनो फर्टिलाइजर के रिसर्च और उत्पादन पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है।
25 से ज्यादा देशों में करता है निर्यात
आपको बता दें कि जून 2021 में IFFCO ने देश में सबसे पहले लिक्विड नैनो-यूरिया लॉन्च किया था और अप्रैल 2023 में नैनो-DAP बाजार में उतारा। आज IFFCO 25 से ज्यादा देशों को नैनो फर्टिलाइजर निर्यात कर रहा है और ब्राजील में भारत के बाहर अपना पहला नैनो-यूरिया प्लांट भी लगा रहा है।
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