सरकार नैनो-फर्टिलाइज़र को स्थायी मंजूरी देने की तैयारी कर रही है, लेकिन उससे पहले सभी परीक्षण रिपोर्टों की गहरी जांच होगी। कंपनियों को टैगिंग रोकने की चेतावनी दी गई है। ICAR के अध्ययन में नैनो यूरिया के मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं। कुछ जगह उपज घटी तो कुछ जगह 5–15% बढ़ी।
केंद्र सरकार अब नैनो-फर्टिलाइजर्स को हर तीन साल में नवीनीकरण की जगह स्थायी मंजूरी देने की योजना बना रही है। सरकार का कहना है कि इससे कंपनियों को काम करने में आसानी होगी और तकनीक का उपयोग भी बढ़ेगा। फिलहाल नैनो-फर्टिलाइज़र 25 से ज़्यादा देशों में इस्तेमाल हो रहे हैं। हालाँकि, स्थायी मंजूरी देने से पहले सभी वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्टों की विशेषज्ञों द्वारा गहरी जांच ज़रूरी होगी।
सम्मेलन में कृषि सचिव का बयान
नई दिल्ली में FAI के सम्मेलन में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि नैनो-फर्टिलाइज़र नई तकनीक है, इसलिए शुरुआती विरोध होना सामान्य है। लेकिन इसके फसल और मिट्टी पर अच्छे असर की वजह से इसे किसान धीरे-धीरे अपना रहे हैं।
सरकार ने कंपनियों से पूरा डेटा मांगा
सरकार ने सभी कंपनियों से कहा है कि वे अपने उत्पादों का पूरा परीक्षण डेटा दें, ताकि स्थायी लाइसेंस जारी किया जा सके।
IFFCO के नैनो यूरिया को पहले ही 3 साल की नई मंजूरी मिल चुकी है, जबकि अन्य कंपनियों का नवीनीकरण जून 2026 में होना है।
कंपनियों को ‘टैगिंग’ न करने की चेतावनी
सरकार ने कहा कि कुछ कंपनियां नैनो-फर्टिलाइज़र को सब्सिडी वाले खाद के साथ जबरन ‘टैग’ करके बेचती हैं। इससे किसानों में गलतफहमी और नाराज़गी बढ़ती है।कृषि सचिव ने उद्योग को चेतावनी देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया तुरंत बंद होनी चाहिए, और इसके बजाय किसानों को सही जानकारी और प्रशिक्षण देने पर जोर देना चाहिए।
वहीं IFFCO का कहना है कि कंपनी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी उत्पाद को जबरन न बेचा जाए। कई बार दुकानदार खुद सुझाव देता है, जिससे गलतफहमी पैदा होती है।
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ICAR का बड़ा अध्ययन
सरकार ने नैनो यूरिया के प्रभाव पर 5 साल का बड़ा अध्ययन शुरू किया है। यह अध्ययन देशभर की मिट्टी, फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर नैनो यूरिया के असर की जांच करेगा।कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि अध्ययन का कुछ हिस्सा कंपनियों द्वारा वित्तपोषित होने से निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
कहीं नुकसान, कहीं फायदा
रिपोर्टों में मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं।जैसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर कृषि विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा अनुसंधान संस्थान से नकारात्मक परिणाम आए हैं। इनके मुताबिक कुछ फसलों में नैनो यूरिया से उपज और गुणवत्ता कम हुई। वहीं हैदराबाद, करनाल, बेंगलुरु, जोबनेर, कल्याणी से सकारात्मक परिणाम आए हैं।इन जगहों पर दो बार स्प्रे करने पर अनाज और तिलहन की पैदावार 5–15% तक बढ़ी।
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