विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी खराब हो रही है, इसलिए देश में एक राष्ट्रीय मिट्टी स्वास्थ्य नीति जरूरी है। कई फसलें कीटनाशक अवशेषों के कारण निर्यात में अस्वीकार हो रही हैं। BioAgri 2025 कार्यक्रम में जैविक खेती और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
भारत में पौध स्वास्थ्य और मिट्टी संरक्षण पर काम करने वाले संस्थान NIPHM के महानिदेशक सागर हनुमान सिंह ने कहा कि देश में मिट्टी की सेहत के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनना बहुत जरूरी है, जैसी यूरोप और अमेरिका में है।
कीटनाशकों का हो रहा ज्यादा इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी को भारी नुकसान हुआ है। पौधों की सेहत और इंसानों की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी होती है, इसलिए अब पूरे देश में मिट्टी को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए नीतियां और कार्यक्रम शुरू करने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से कई फसलें, खासकर तेलंगाना की मिर्च, विदेशी बाजारों में स्वीकार नहीं की जा रहीं, इसलिए अभी कदम उठाना जरूरी है ताकि भारत की फसलें निर्यात के लिए सुरक्षित रहें।
जैविक परंपरा को फिर से अपनाएँ
BioAgri 2025 कार्यक्रम में कावेरी यूनिवर्सिटी के कुलपति वी. प्रवीन राव ने कहा कि कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए सरकारी संस्थानों और जैविक कृषि उद्योग के बीच साझेदारी को और मजबूत करना होगा। BIPA (BioAgri Input Producers Association) के अध्यक्ष जॉन पीटर ने कहा कि जैविक कृषि भारत के लिए नई नहीं है।उन्होंने कहा कि हम आठ दशक पहले जैविक तरीके से खेती करते थे, फिर रासायनिक खेती बढ़ी। अब समय है कि हम अपने जैविक परंपरा को फिर से अपनाएँ।
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BIPA क्या करती है?
BIPA के महासचिव वेंकटेश देवेनूर ने बताया कि वे अब विदेशों में भी विस्तार की तैयारी कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत श्रीलंका से होगी। इसके लिए Kaveri Agri University के साथ कौशल विकास पर एक समझौता भी किया गया है।BIPA में 100 से अधिक सदस्य कंपनियाँ शामिल हैं जो जैविक कृषि से जुड़ी तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता और नीतियों पर काम करती हैं।
नई जैविक तकनीकों पर चर्चा
“Nurturing Nature, Nourishing the Future” थीम पर आयोजित इस दो दिन के सम्मेलन में 200 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। यहां 40 से अधिक स्टॉल लगे, जिनमें नई जैविक तकनीकों को दिखाया गया। कार्यक्रम में जैविक उत्पाद, नई बायोटेक तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती, नीतियों में बदलाव और टिकाऊ कृषि के बाजार से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है।
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