हरियाणा में खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था

खाद वितरण

हरियाणा सरकार ने खाद वितरण को ‘मेरी फसल–मेरा ब्यौरा’ (MFMV) पोर्टल से जोड़ दिया है। अब रजिस्ट्रेशन के बाद ही किसानों को खाद मिलेगी। नई व्यवस्था से काला बाजारी रुकी, खपत घटी और सरकार ने सब्सिडी में बड़ी बचत की। छोटे किसानों तक भी खाद आसानी से पहुंच रही है।

हरियाणा सरकार ने खाद देने की पूरी व्यवस्था बदल दी है। अब किसानों को खाद केवल तभी मिलेगी, जब वे ‘मेरी फसल–मेरा ब्यौरा’ (MFMV) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएंगे। बिना रजिस्ट्रेशन के खाद नहीं दी जाएगी। इस वजह से कई किसान परेशान हैं, क्योंकि लाइनें भी लग रही हैं और टेक्निकल दिक्कतें भी आ रही हैं। वहीं सरकार का कहना है कि यह नया सिस्टम पहले पंचकूला में ट्रायल के तौर पर लगाया गया था और वहां बहुत अच्छे नतीजे मिले। इसी कारण इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।

कैसे मिलेगा खाद?
राज्य में किसानों को अब खाद तभी दी जाएगी जब किसान की जमीन का रिकॉर्ड सही हो। पोर्टल पर दर्ज फसल की जानकारी सही हो और आधार से जुड़ा बैंक खाता सही हो।सरकार का दावा है कि 25 लाख रजिस्टर्ड किसानों में से 90% को बिना लाइन लगे और बिना देरी के खाद मिल भी चुकी है।

गलत खरीद, चोरी और काला बाजारी कम हुई
नई व्यवस्था से खाद की हेराफेरी बंद हुई, थोक में गलत खरीद रुक गई और सब्सिडी वाली खाद की अवैध बिक्री भी घटी है।सरकार ने बताया कि 6 महीने में 4455 जांचें हुईं, 120 नोटिस भेजे गए, 36 लाइसेंस रद्द/निलंबित किए और 28 एफआईआर दर्ज की गईं।वहीं यूरिया और डीएपी की चोरी में भी 8–10% की कमी आई है।
उन्होंने बताया कि खेत का रकबा बढ़े बिना ही खाद की खपत कम हो गई है।8 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच यूरिया की खपत 48,150 मीट्रिक टन (10.12%) और डीएपी की खपत 15,545 मीट्रिक टन (7.92%) कम हुई। सिर्फ इस कमी से ही सरकार ने 351.90 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाई है।

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छोटे किसानों को फायदा
सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था से बड़े किसानों द्वारा ज्यादा खाद खरीदना कम हुआ है। वहीं 40 बैग से ज्यादा खरीदने वालों की संख्या 43% घटी है।जबकि 20 बैग से कम लेने वाले 16% बढ़े हैं।यानी अब छोटे किसानों तक भी खाद आसानी से पहुंच रही है।

किसानों का भरोसा बढ़ा
MFMV पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों की संख्या 9.20 लाख से बढ़कर 12.80 लाख हो गई है। इसके साथ ही संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिला है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी।कृषि मंत्री राणा ने बताया कि दिल्ली में हुई बैठक में केंद्र सरकार के अधिकारियों ने हरियाणा के इस मॉडल की सराहना की और कहा कि इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।

सरकार का दावा
सरकार का कहना है कि इस रबी सीजन में 2.5 लाख MT खाद की बचत होगी, जिससे 1,030 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी बच सकती है।नई व्यवस्था के बाद सरकार का कहना है कि खाद की रियल-टाइम निगरानी होती है, जो खाद हरियाणा को मिलती है, वही हरियाणा के किसानों तक पहुंचती है। लाइनें, घबराहट, फर्जी बिलिंग और जमाखोरी खत्म हो गई है।सरकार के अनुसार यह किसान सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।

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