ICAR-IARI ने सरसों की नई किस्म पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14) विकसित की है, जो चार प्रमुख रोगों से सुरक्षित है और 132 दिनों में तैयार होकर 21.48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है। इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए मंजूरी मिली है।
रबी सीजन की बुवाई शुरू होने वाली है और इसी बीच सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने नई किस्म पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14) पेश की है। यह किस्म सफेद रतुआ, अल्टरनेरिया ब्लाइट और फफूंद जैसे चार बड़े रोगों से बचाव करने में सक्षम है। इस उन्नत किस्म को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के किसानों के लिए बुवाई की मंजूरी दी गई है।
ICAR-IARI ने विकसित की सरसों की नई किस्म
ICAR के अधीन कार्यरत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली ने इस किस्म को तैयार किया है। इसे मार्च 2025 में मंजूरी दी गई थी और अब इसे सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।

सिर्फ 132 दिन में तैयार, 22 क्विंटल तक उपज
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सरसों की किस्म 132 दिनों में तैयार हो जाती है और एक हेक्टेयर से 21.48 क्विंटल तक उपज दी सकती है। रोगों से सुरक्षा के कारण किसानों को कीटनाशकों या दवाओं पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता, जिससे लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
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4 बड़े रोगों से सुरक्षा
पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14) सरसों फसल को इन चार प्रमुख रोगों से बचाती है —
सफेद रतुआ (White Rust)
अल्टरनेरिया ब्लाइट (Alternaria Blight)
स्केलेरोटिनिया स्टेम रॉट (Sclerotinia Stem Rot)
डाउनी और पाउडरी फफूंद (Downy & Powdery Mildew)
इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है और किसानों को नुकसान की संभावना बहुत कम होती ह
सरसों का MSP बढ़ा, बुवाई क्षेत्र भी बढ़ने की उम्मीद
केंद्र सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹200 बढ़ाकर ₹5,650 प्रति क्विंटल कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से रबी सीजन में सरसों की बुवाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर से ज्यादा हो सकता है।पिछले साल (2022-23) में सरसों की खेती का क्षेत्रफल 98.02 लाख हेक्टेयर था, जो 2021-22 की तुलना में 6.77 लाख हेक्टेयर अधिक था। सरकार का लक्ष्य है कि देश खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बने, और इस दिशा में सरसों की यह नई किस्म बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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