कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने बागलकोट में चल रहे गन्ना किसानों के आंदोलन पर कहा कि शुगर मंत्री को गन्ने की कीमत जल्द तय करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मुद्दा जल्द नहीं सुलझा तो पुलिस के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगा। किसान ₹3,500 प्रति टन का भाव मांग रहे हैं और सरकार पर चीनी मिलों का पक्ष लेने का आरोप लगा रहे हैं।
बेंगलुरु में कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने बागलकोट में चल रहे गन्ना किसानों के आंदोलन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर शुगर मंत्री शिवानंद पाटिल से बात की है और उन्हें निर्देश दिया है कि गन्ने का समर्थन मूल्य (कीमत) जल्द तय किया जाए ताकि किसानों की समस्या का समाधान हो सके। मंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि अगर यह मुद्दा समय रहते नहीं सुलझा, तो पुलिस के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगा।
महाराष्ट्र में ₹3,600 प्रति टन का भुगतान
इससे पहले बेलगावी, विजयपुरा और बागलकोट जिलों के किसानों ने गुरुवार को मुदलगी तालुका के गुरलापुर चौराहे पर प्रदर्शन किया। किसानों की मांग है कि कर्नाटक की चीनी मिलें चालू पेराई सत्र की पहली किस्त के रूप में गन्ने के लिए ₹3,500 प्रति टन का भुगतान करें। उनका कहना है कि महाराष्ट्र की चीनी मिलें पहले से ही ₹3,600 प्रति टन का भुगतान कर रही हैं।
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किसानों की चेतावनी
किसानों ने सरकार और मिल मालिकों के खिलाफ नारे लगाए और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल तथा जिला प्रभारी मंत्री सतीश जरकीहोली की आलोचना की। कर्नाटक राज्य रैयत संघ और हसीरू सेना के नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक गन्ने की कीमत की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, विरोध जारी रहेगा।
सरकार पर आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार “चीनी मिलों की गुलाम” बनकर काम कर रही है, जबकि कई जनप्रतिनिधि खुद मिलों के मालिक हैं। उनका कहना है कि सरकार को मिलों से राजस्व तो मिलता है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा।उन्होंने कहा कि सरकारें किसानों के वोटों से बनती हैं, लेकिन उनके मुद्दों को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है।