पराली को लेकर उत्तर प्रदेश के किसानों ने हरियाणा और पंजाब से सबक नहीं लिया

हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है।

इस साल हरियाणा और पंजाब में तो पराली जलाने की घटनाओं में 96% तक की कमी आई है, लेकिन उत्तर प्रदेश में ये आंकड़ा बढ़ गया। सीआरईएएमएस के बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 660 पराली में आग की घटनाएं 15 सितंबर से 21 अक्टूबर 2025 के बीच दर्ज हुई हैं।

हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है। हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग पराली तो, कुछ लोग दिवाली पर छुड़ाए गए पटाखों को इसके लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। Down to Earth में छपी रिपोर्ट में आंकड़ों के हवाले बताया गया है कि, 15 सितंबर से 21 अक्टूबर 2025 के बीच छह राज्यों, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पराली में आग की कुल 1,729 घटनाएं दर्ज की गईं हैं। इस अवधि में पंजाब में पराली में आग की 415 घटनाएं हुई हैं जो पिछले छह सालों का सबसे न्यूनतम आंकड़ा है। 

न्यूज पोटली टीम 15 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक हरियाणा-पंजाब के कई जिलों में गई। इस दौरान सिर्फ 1-2 जगह की पराली जलती नजर आई। इसको लेकर हमारी टीम ने कई किसानों से भी बात की तो सभी ने ये बताया है कि, इस बार उन्होंने फसल अवशेष को जलाया नहीं, बल्कि उसे खाद की तरह इस्तेमाल किया।

नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोईकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) के 21 अक्टूबर के बुलेटिन के मुताबिक, पंजाब में 15 सिंतबर से 21 अक्टूबर 2024 के बीच की 1,510 आग की घटनाएं, 2023 में 1,764 आग की घटनाएं, 2022 में 3,114 आग की घटनाएं, 2021 में 4,327 आग की घटनाएं और 2020 में 10,791 पराली में आग की घटनाएं दर्ज की गई थीं। 2020 से 2025 की तुलना करें तो पंजाब में करीब 96% पराली जलाने की घटना में कमी आई है।

पंजाब के अलावा दूसरे धान के बड़े उत्पादक राज्य हरियाणा में भी आंकड़े कुछ यही हालात बयां कर रहे हैं। प्रदेश में 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच पराली में आग की 55 घटनाएं दर्ज की गई हैं। 2024 में हरियाणा में 655, साल 2023 में 689, साल 2022 में 771, साल 2021 में 1,367 और साल 2020 में 1,326 पराली में आग की घटनाएं दर्ज की गई थीं।

हरियाणा और पंजाब के किसानों ने भले ही पराली के साइड इफेक्ट को समझ कर अवशेष को जलाना बंद कर दिया, लेकिन दिल्ली से सटे यूपी में हालात और बिगड़ें हैं। यहां पराली में आग की घटनाएं बढ़ रही हैं। 2025 में यहां सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटना सामने आई है।

सीआरईएएमएस के बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 660 पराली में आग की घटनाएं 15 सितंबर से 21 अक्टूबर 2025 के बीच दर्ज हुई हैं। साल 2020 के बीच राज्य का यह दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2024 में इस अवधि के दौरान 723 पराली में आग की घटनाएं दर्ज की गई थीं।

बुलेटिन के अनुसार, पंजाब के 21 जिलों में पराली में आग की घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें सबसे अधिक 136 घटनाएं तरनतारण और 120 घटनाएं अकेले अमृतसर की हैं। हरियाणा के 14 जिलों में आग की घटनाएं हुई हैं जिनमें सर्वाधिक 15 घटनाएं जींद जिले की हैं।

उत्तर प्रदेश के 58 जिलों में आग की घटनाएं सैटेलाइट के जरिए रिपोर्ट की गई हैं। इसमें मथुरा, बाराबंकी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अलीगढ़ और फतेहपुर सबसे आगे हैं।

छह राज्यों में 21 अक्टूबर को 268 पराली में आग की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 62 घटनाएं पंजाब, 4 घटनाएं हरियाणा, 103 घटनाएं उत्तर प्रदेश, 41 घटनाएं राजस्थान और 58 घटनाएं मध्य प्रदेश की हैं। 

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