उत्तर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ मशरूम की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। राज्य सरकार और उद्यान विभाग एयर-कंडीशन्ड यूनिट्स लगाने में किसानों की मदद कर रहे हैं, जिससे वे पूरे साल उच्च गुणवत्ता वाला मशरूम उगा सकें।
उत्तर प्रदेश में अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मशरूम की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। राज्य सरकार और उद्यान विभाग किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और इस दिशा में अनुदान और तकनीकी सहायता भी दी जा रही है।
एयर-कंडीशन्ड यूनिट से पूरे साल होगा उत्पादन
सरकार किसानों को वातानुकूलित (एयर-कंडीशन्ड) मशरूम यूनिट्स लगाने में मदद कर रही है, जिससे किसान सालभर मशरूम उगा सकते हैं। इन यूनिट्स में तापमान को नियंत्रित रखकर किसी भी मौसम में फसल तैयार की जा सकती है।
इससे न सिर्फ गुणवत्ता बेहतर रहती है, बल्कि फसल विफलता का खतरा भी घटता है।
उद्यान विभाग दे रहा है प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता
उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मशरूम की खेती किसानों को नकदी फसल और स्थिर आय का भरोसा देती है।
विभाग किसानों को न केवल प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है, बल्कि आर्थिक सहायता भी प्रदान कर रहा है ताकि अधिक से अधिक किसान इस व्यवसाय से जुड़ सकें।
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कैसे लें योजना का लाभ?
जो किसान वातानुकूलित यूनिट लगाना चाहते हैं, वे उद्यान विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- यूनिट की कुल लागत लगभग ₹80 लाख है।
- सरकार इस पर 40% अनुदान दे रही है।
- आवेदन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़:
- डीपीआर (डिज़ाइन प्रोजेक्ट रिपोर्ट)
- आधार कार्ड
- ज़मीन के कागज़ात
- बैंक पासबुक
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुदान सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
मशरूम खेती से आर्थिक मजबूती की ओर
मशरूम की खेती से किसान अब पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम कर सकते हैं।यह न सिर्फ कम जगह और पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल है, बल्कि इससे किसानों को सालभर स्थिर आय भी मिलती है।राज्य सरकार की यह पहल आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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