लखनऊ में किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की।मुख्य मांगों में गन्ने का मूल्य ₹450 प्रति क्विंटल करना, कृषि ऋण माफी, सस्ती बिजली, फसल बीमा में सुधार, एमएसपी को कानूनी दर्जा, और आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा शामिल हैं।किसानों ने कहा कि खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है, इसलिए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
लखनऊ। प्रदेश के किसानों की लगातार बढ़ती परेशानियों को लेकर शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष आलोक वर्मा के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 17 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से सौंपा। किसानों का कहना है कि खेती की लागत बढ़ रही है, जबकि उपज का मूल्य घटता जा रहा है। ऊपर से प्राकृतिक आपदाओं, समय पर भुगतान न मिलने और आवारा पशुओं के प्रकोप ने किसानों को आर्थिक रूप से कमज़ोर कर दिया है। ऐसे में सरकार को अब किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
प्रमुख मांगें
किसानों ने अपने ज्ञापन में कई अहम मांगें रखीं। सबसे प्रमुख मांग थी कि गन्ने का मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और बकाया भुगतान पर ब्याज सहित त्वरित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, छोटे और सीमांत किसानों के सभी कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि बिजली की स्मार्ट मीटर प्रणाली समाप्त कर, उन्हें मुफ्त या रियायती दर पर बिजली दी जाए।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार की माँग
इसके अलावा, किसानों ने फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए ठोस नीति बनाने और हर गांव में गो-आश्रय स्थल को सुचारू रूप से चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए ताकि किसानों को समय पर और वास्तविक मुआवज़ा मिल सके।
MSP को कानूनी दर्जा देने की माँग
किसानों ने यह भी कहा कि कृषि उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा दिया जाए, ताकि किसान को अपनी फसल का उचित दाम मिल सके। डीजल, खाद, बीज और कीटनाशक पर टैक्स में छूट दी जाए, जिससे खेती की लागत घटे। साथ ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि 6,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रति वर्ष करने की मांग भी की गई।
किसान पेंशन योजना लागू की जाए
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और कीट प्रकोप की स्थिति में किसानों को त्वरित राहत और फसल क्षतिपूर्ति दी जाए। साथ ही, वृद्ध किसानों के लिए किसान पेंशन योजना लागू की जाए, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
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प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने की भी मांग
किसानों ने हर जिले में कृषि मंडी और भंडारण केंद्रों की स्थापना, भूमिहीन किसानों को सरकारी भूमि पर दीर्घकालीन लीज़, और कृषि आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने की भी मांग की। इसके अलावा, किसानों ने कहा कि सरकार किसान संगठनों से नियमित संवाद बनाए रखे और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करे।
बड़ी संख्या में किसान हुए शामिल
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष आलोक वर्मा, प्रदेश महासचिव गणेश शंकर, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, मध्यांचल उपाध्यक्ष सरदार दिलराज सिंह, जिला महासचिव आशीष यादव, महानगर अध्यक्ष मोहम्मद इमरान, जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद वसीम मुन्ना, जिला महिला महासचिव मोनिका यादव, ब्लॉक अध्यक्ष काकोरी श्याम बिहारी, ब्लॉक अध्यक्ष मोहनलालगंज शिवम कश्यप, जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष सुरेंद्र वर्मा, जिला संरक्षक किशोरी लाल पटेल, युवा जिला अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ, मंडल महामंत्री अजय तिवारी, मंडल सचिव कप्तान सिंह, और ब्लॉक अध्यक्ष चिनहट अयोध्या रावत समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
जल्द करें कार्रवाई
किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार जल्द इन मांगों पर कार्रवाई नहीं करती, तो किसान संगठन आंदोलन को तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार यदि वास्तव में किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है, तो सबसे पहले किसानों की बुनियादी जरूरतें और हक पूरे करने होंगे।
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