उत्तर गुजरात में भारी बारिश का कहर: बनासकांठा में 10,000 एकड़ खेती की जमीन जलमग्न, किसानों के सपने डूबे

भारी बारिश

उत्तर गुजरात में मानसून इस बार किसानों के लिए आफत बनकर आया है। बीते दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने बनासकांठा जिले में तबाही मचा दी है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार डीसा तालुका और आसपास के गांवों में करीब 9 इंच बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते खेतों में 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है। करीब 10,000 एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न हो गई है और किसानों की मेहनत का फल – खासकर मूंगफली की फसल – पूरी तरह से नष्ट हो गई है।

खेतों में समंदर जैसा दृश्य, सड़कें बनी नदियाँ
डीसा तालुका के दामा, रामपुरा, वरन, जेनाल और लक्ष्मीपुरा गांवों से जो हवाई दृश्य सामने आ रहे हैं, वो दिल दहला देने वाले हैं। जहां हरे-भरे खेत हुआ करते थे, वहां अब सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। सड़कें पूरी तरह से डूब गई हैं और उन पर नदी जैसी धाराएं बह रही हैं। गांवों के आपसी संपर्क टूट गए हैं, और लोग गांवों में फंसे हुए हैं।

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मूंगफली की फसल पूरी तरह बर्बाद, पशुपालक भी संकट में
खेती के साथ-साथ पशुपालन पर भी गहरा असर पड़ा है। मवेशियों के चारे और पीने के पानी की भारी किल्लत हो गई है। जिन खेतों में चारा उगाया जाता था, वे अब जलाशय बन गए हैं। पशुपालकों के मुताबिक, पशुओं को खाना तक नहीं मिल पा रहा है और बीमार जानवरों के इलाज के लिए रास्ते बंद हैं।

किसानों का दर्द
दामा गांव के किसान दीपकभाई परमार कहते हैं,

“हमने दिन-रात मेहनत करके मूंगफली की फसल लगाई थी। महंगे बीज, खाद और मजदूरी का खर्च उठाया, लेकिन अब सब कुछ बर्बाद हो गया। खेतों में अभी भी 5 फीट तक पानी भरा है। फसल सड़ गई है।”

वरन गांव के बुजुर्ग किसान राजुभाई पटेल ने कहा,

“मैं 40 साल से खेती कर रहा हूं, लेकिन ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। अगर सरकार से तुरंत मदद नहीं मिली, तो हम कर्ज में डूब जाएंगे और अगली फसल की उम्मीद भी नहीं कर पाएंगे।”

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प्रशासन की तैयारी और राहत की उम्मीद
बनासकांठा जिला प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय की गई हैं। राहत शिविर, चारा शिविर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। लेकिन अगर बारिश यूं ही जारी रही, तो राहत पहुंचाने में काफी मुश्किलें आ सकती हैं

स्थिति की गंभीरता
मुद्दा स्थिति

भूमि 10,000 एकड़ खेती की जमीन जलमग्न
फसल मूंगफली, मक्का समेत अन्य फसलें 100% नष्ट
सड़कें गांवों के रास्ते पूरी तरह बंद
पशुपालन चारा नष्ट, मवेशियों को भोजन-पानी नहीं
मानव जीवन गांवों में फंसे लोग, तत्काल राहत की जरूरत

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निष्कर्ष
उत्तर गुजरात का बनासकांठा जिला इस वक्त प्राकृतिक आपदा के दौर से गुजर रहा है। किसान और पशुपालक दोनों परेशान हैं। राज्य सरकार और प्रशासन से तुरंत राहत पैकेज, बीमा क्लेम, पशुओं के लिए चारा-पानी और फसलों का सर्वे कर मुआवजा देने की आवश्यकता है।
यह सिर्फ बारिश नहीं है – यह किसानों की मेहनत, सपना और जीवन पर चोट है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बहुत बड़ी त्रासदी में बदल सकता है।

गुजरात से न्यूज़ पोटली के लिए अभिषेक गोंडलिया की रिपोर्ट

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