मात्र पाँच बीघे में Horticulture से सालाना 30 से 35 लाख की कमाई करती हैं राजस्थान की संतोष

SANTOSH

“इस खेती में आकर हमें सुकून मिला और इनकम भी शुरू हुई …हम किसान भाइयों से कहना चाहेंगे कि अगर आप तकनीक का इस्तेमाल करेंगे तो आमदनी भी बढ़ा पाएंगे और लागत भी कम आएगी.” यह कहना है किसान संतोष खेदड़ का.

संतोष खेदड़ राजस्थान के सीकर जिले में बेरी इलाके की रहने वाली हैं. वो और उनके पति अपनी नई सोच और मेहनत से मात्र पाँच बीघे में बाग़वानी से सालाना 30 से 35 लाख की कमाई कर रहे हैं, जो कम जोत वाले किसानों के लिए मिसाल है. संतोष अनार के अलावा मौसमी, अमरूद, चीकू की बाग़वानी करती हैं। राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में उन्होंने सेब की भी बागवानी की हुई है. यह तकनीक और उनकी मेहनत से ही संभव हो पाया है. वो खेती में तकनीक के इस्तेमाल को ज़रूरी मानती है.

संतोष आज भले ही एक सफल किसान हों, लेकिन 2006-2007 में उनकी महीने की आमदनी मात्र 3000 रुपये ही थी. उन्होंने 2008 में अनार की बागवानी शुरू की. धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि खेती को मुनाफे का सौदा बनाना है तो तकनीक के साथ चलना पड़ेगा. फिर उन्होंने जैन इरीगेशन से टपक सिंचाई और सोलर लगवाया. इससे कम पानी में भी बेहतर सिंचाई होने लगी और जहां पॉवर की ज़रूरत होती उसके लिए सोलर का प्रयोग होने लगा. इससे लागत में काफ़ी कमी आयी और उत्पादन भी बढ़ा.

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नर्सरी से भी होती है अच्छी कमाई
संतोष ने अनार की नर्सरी भी लगाया है, जिससे उनकी अच्छी कमाई होती है. खेती को फ़ायदे का सौदा बनाने में संतोष ने कोई कसर नहीं छोड़ी और यही वजह है कि आज वो एक सफल किसान हैं. इसके लिए संतोष को किसान वैज्ञानिक की उपाधि भी मिली है. वो देश-प्रदेश स्तर पर कई सम्मान और पुरस्कार भी जीत चुकी हैं. इतना ही नहीं संतोष आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में जाकर खेती के बारे में जानकारी भी देती हैं.

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हार्टिकल्चर क्यों है बेहतर?
संतोष हार्टिकल्चर को बेहतर बताते हुए कहती हैं कि गेहूं-धान और ज्वार-बाजरा की खेती से वैसी कमाई नहीं हो सकती जैसे बाग़वानी से होती है. हार्टिकल्चर में पौधों की कटाई-छंटाई को बहुत जरूरी बताते हुए संतोष कहती हैं कि ये आम और अनार से लेकर अंगूर-अमरुद सब पर लागू होता है, क्योंकि फल हमेशा नई टहनियों पर ही आते हैं. ख़ासकर वहां जहां सूरज की पूरी रौशनी पड़ती है. पौधों की लाइफ बढ़ाने, क्वालिटी और क्वांटिटी से भरपूर उत्पादन के लिए संतोष ने जैविक खेती अपनाई है. आज वो खाद से लेकर कीटनाशक तक खुद घर में तैयार करती हैं, जिससे उन्हें कई फायदे मिलते हैं.

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तकनीक का इस्तेमाल है ज़रूरी
संतोष की इस सफलता में तकनीक का बहुत बड़ा योगदान है. वो भले ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, लेकिन फ़ार्म मशीनरी और दूसरे खेती किसानी से जुड़ी तकनीक को बहुत अहम मानती हैं. दूसरे किसानों को भी तकनीक से जुड़ कर बाग़वानी करने की सलाह देती हैं.
संतोष ने अपनी इस सफल बागवान बनने के सफ़र में सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की भी मदद ली. उनका मानना है कि सभी किसानों को इसकी मदद लेनी चाहिए.

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संतोष का मानना है कि समझदारी से की जाये तो खेती किसानी में बहुत फ़ायदा है. इसीलिए उन्होंने अपने बच्चों को भी खेती से जोड़े रखा है.

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