महाराष्ट्र के इस युवा किसान ने तुअर उत्पादन में बनाया नया रिकॉर्ड

किसान

एक एकड़ खेत में 19.50 क्विंटल तुअर दाल का रिकॉर्ड उत्पादन। जी हाँ, इसे रिकॉर्ड उत्पादन ही कहेंगे क्योंकि ऐसा अभी तक तो नहीं हुआ। शायद इसलिए तो दुनिया भर में हम सबसे बड़े दाल आयातक देश हैं। लेकिन ये संभव कर दिखाया है महाराष्ट्र के युवा किसान हनुमंत रोकड़े ने। हनुमंत कृषि योद्धा नाम के 11 किसानों के समूह के सरपंच हैं। इनके अलावा इस समूह के सदस्य सुनील दौंडे ने 18.60 क्विंटल की जोरदार पैदावार हासिल की है और समूह के बाक़ी लोगों ने भी प्रति एकड़ 15 क्विंटल का रिकॉर्ड उत्पादन लिया है। आपको बता दें कि यह उत्पादन औसत से बहुत ज़्यादा है। और महाराष्ट्र के इस इलाक़े के लिये तो और भी, जहां पानी जैसी मूल भूत चीजों की बहुत समस्या है। लेकिन इस सफलता में एक्टर आमिर ख़ान के Paani Foundation का भी योगदान है। इस फाउंडेशन की मदद से ही यहाँ के किसान खेती में नये रिकॉर्ड बना रहे हैं।

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तुअर की गोदावरी किस्म की बीज से रिकॉर्ड उत्पादन
हनुमंत रोकड़े महाराष्ट्र के करमाला तालुका के फिसारे गांव से हैं। न्यूज़ पोटली से बात कर रोकड़े बताते हैं कि उन्होंने तुअर जैसी सामान्य फसल को यह सोचकर चुना कि इसमें ज्यादा खर्च नहीं आएगा। उन्होंने अपनी इस रिकॉर्ड उत्पादन का श्रेय पानी फाउंडेशन, कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के वैज्ञानिकों को देते हुए कहा कि इन सभी के मदद और मार्गदर्शन से ही ये सब संभव हो पाया है। इसके अलावा वो इसका श्रेय वसंतराव नाइक कृषि विश्वविद्यालय की तुअर की गोदावरी किस्म को भी देते हैं। मतलब अगर देश में सरकार, कृषि वैज्ञानिक और किसान मिलकर काम करें तो बहुत कुछ संभव है। इसीलिए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा ‘लैब तो लैंड’ की बात करते हैं। देखिए ‘लैब तो लैंड’ के तर्ज़ पर काम हुआ तो सफलता आपके सामने है।

भारत सबसे बड़ा उत्पादक भी और सबसे बड़ा आयातक भी
आपको बता दें कि पीआईबी के मुताबिक़ भारत विश्व में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक (वैश्विक उत्पादन का 25%), उपभोक्ता (विश्व खपत का 27%) तथा आयातक (14%) है। देश ने वित्त वर्ष 2023-24 में 4.65 मिलियनमीट्रिकटन दालों का आयात किया (जो वर्ष 2022-23 में 2.53 मिलियन टन से अधिक है), जो वर्ष 2018-19 के बाद से सबसे अधिक है। और वर्ष 2023-24 में भारत ने 7.71 लाख टन तुअर यानी अरहर का आयात किया। तो बात ये है कि अगर देश के किसान हनुमंत के इतना ना भी तो उनके आस पास भी उत्पादन करने लगे तो हमारा देश बड़ा आयातक नहीं सबसे बड़ा दाल निर्यातक बन सकता है।और इसकी पूरी संभावना भी दिख रही है। क्योंकि अब मौजूदा सरकार भी दलहन की खेती को बढ़ावा दे रही है।

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मिट्टी की जाँच बहुत ज़रूरी
बुवाई से पहले मिट्टी की जाँच को ज़रूरी बताते हुए हनुमंत ने बताया कि तुअर की फसल उन्होंने जून के महीने में लगाया था। बुवाई से पहले उन्होंने खेत में गोबर की खाद डाली थी और बुवाई के लिए उन्होंने किसी तरह की मशीन का प्रयोग नहीं किया था बल्कि मज़दूरों ने हाथ से बुवाई की।

सिंचाई का महत्व
बम्पर उत्पादन के लिए सिंचाई के समय को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने सिंचाई के लिए बारिश के पानी के अलावा जून से लेकर दिसंबर में फसल के Harvest होने तक ड्रिप सिंचाई के इस्तेमाल से कुल तीन सिंचाई की थी। पहला तब जब पौधों में branches आने लगे थे। दूसरा तब जब फसल में Flowering होने लगी और तीसरा 125 से 140 दिनों के बाद फली भरने की अवस्था में।

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किया sticky trap का इस्तेमाल
जहां एक ओर उत्पादन बढ़ाने के होड़ में किसान chemical fertiliser का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वहाँ हनुमंत का कहना है कि वह और समूह के बाक़ी सभी किसानों ने  pest control के लिए कुछ आर्गेनिक स्प्रे के अलावा उन्होंने अपने खेत में sticky trap, light trap आदि का इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि जब फसल 45 दिन की हो गई तो उसका ऊपरी भाग हटा दिया गया। जिसके कारण फसल की शाखाओं में वृद्धि हुई। साथ ही फूलों और फलियों की संख्या में भी वृद्धि हुई। 

तो यह महाराष्ट्र के हनुमंत रोकड़े की कहानी हमें बताती है कि अगर सच्चे मन से सही दिशा में परिश्रम किया जाये और इसमें सही लोगों का सहयोग मिले तो सफलता निश्चित है।

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