सचिन तेंदुलकर से मिलना चाहती है सुशीला मीणा

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प्रतापगढ़ (राजस्थान)। टूटे-फूटे घर के बाहर कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं, गाय-भैंस के बीच बनी पिच पर एक लड़का बैट थामे खड़ा है और दूसरी तरफ 10-11 साल की लड़की रफ्तार में बॉलिंग कर रही है। ये सुशीला मीणा है। मजदूर माता-पिता की वही आदिवासी बच्ची जो भारत रत्न सचिन तेंदुलकर के एक पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर छाई है, जिसके बॉलिंग एक्शन की तुलना जहीर खान से की जा रही है।

एक छोटे से वीडियो ने इस आदिवासी इलाके में हलचल मचा दी है। पिछले 15-20 दिनों में सुशीला मीणा की दुनिया 45-90 डिग्री तक घूम चुकी है। दरवाजे से निकलकर वह स्टेडियम तक पहुंच चुकी है, और 6 जनवरी को सुशीला ने नेट प्रैक्टिस में ओलंपिक विजेता, राजस्थान के कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को क्लीन बोल्ड कर दिया। राठौर ने लिखा, “छोटी सी बिटिया से हारकर हम सब जीत गए।”

सुशीला एक उम्मीद है, अपने इलाके की हजारों लड़कियों के लिए, जो जंगल से लकड़ियां बीनकर लाती हैं, और उनके माता-पिता के लिए, जिनके लिए बच्चों को स्कूल भेज पाना ही किसी अवार्ड से कम नहीं।

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सुशीला न्यूज पोटली से बात करते हुए कहती हैं, “मैं सचिन सर से बात करना चाहती हूं। मैं पहले सचिन सर को नहीं जानती थी क्योंकि हमारे घर में टीवी नहीं है। मेरे कोच ने मुझे क्रिकेट सिखाया है। मैं अच्छे से ट्रेनिंग लेकर भारत के लिए खेलना चाहती हूं।”

कुछ दिन पहले क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने X पर सुशीला मीणा के बॉलिंग का वीडियो पोस्ट किया था और लिखा था, “स्मूद, प्रभावशाली और देखने में बहुत प्यारा लग रहा है। सुशीला मीणा के बॉलिंग में जहीर खान की झलक दिखाई देती है। क्या आपको ऐसा लगता है?” इस पोस्ट पर जहीर खान ने लिखा, “आपने बिल्कुल सही कहा, और मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं। उसकी एक्शन इतनी स्मूद और प्रभावशाली है, वह पहले ही काफी उम्मीदें जगा रही है!”

लगभग 10 साल की सुशीला मीणा राजस्थान और मध्य प्रदेश बॉर्डर स्थित राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के रामेरतालाब में रहती हैं। यह आदिवासी इलाका है। सुशीला का परिवार और इस गाँव में रहने वाले लोग गुजरात से विस्थापित होकर रामेरतालाब में बसे हैं।

हम लखनऊ से लगभग 1,000 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करके सुशीला के गांव पहुंचे। सचिन तेंदुलकर के इस वीडियो पोस्ट के बाद अब सभी लोग सुशीला को जानने लगे हैं। सुशीला के घर जाते वक्त रास्ते में हमसे 8 साल की रमशीला मीणा मिली, जो अपने साथियों के साथ जंगल से लकड़ियां ला रही थी। उसने हमें सुशीला के घर का पता बताया।

सुशीला के गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। सुशीला का परिवार मिट्टी और लकड़ी से बने छोटे से झोपड़ी जैसे घर में रहता है। उनके घर के बाहर के किचन में गेंदे के फूलों की माला टंगी हुई थी। कुछ बाहर 10-15 किराए की कुर्सियां रखी हुई थीं, ताकि लोग सुशीला से मिलने आए तो वे बैठ सकें। सुशीला कक्षा पांचवीं में पढ़ती है। सुशीला के माता-पिता मजदूरी करने के लिए अहमदाबाद जाते हैं, जिससे उनका घर चलता है।

सुशीला की मां शांति बाई मीणा कहती हैं, “हम सुशीला को सुबह स्कूल भेज देते हैं, वहाँ पढ़ाती हैं या खिलाती हैं, मुझे नहीं पता। अच्छा लग रहा है कि लोग मिलने आ रहे हैं। बेटी ने नाम रोशन किया है, मंत्री और विधायक मिलने आ रहे हैं। अगर सरकार मदद करेगी, तो बच्ची आगे बढ़ सकती है। क्रिकेटर बन जाएगी तो अच्छा लगेगा। हमारी स्थिति खराब है, पैसा कहां से लाकर उसे ट्रेनिंग दिलवाएं। हम गन्ने के काम करते हैं।”

आगे सुशीला की मां कहती हैं, “हमारे तीन बच्चे हैं, सुशीला मंझली है। हम लोग काम करने जाते हैं तो सुशीला ही खाना बनाती है। तीनों भाई-बहन मिलकर घर संभालते हैं।”

सुशीला के गांव के सभी बच्चे शानदार क्रिकेट खेलते हैं। उनके बैटिंग या बॉलिंग का स्टाइल भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों जैसा होता है। सुशीला कहती हैं, “मैं पहले बैटिंग करती थी, फिर मेरे कोच ने मुझे बॉलिंग करने को कहा, तो मैंने बॉलिंग शुरू कर दी। अब मेरा वीडियो देखकर बहुत सारे लोग मुझसे मिलने आए हैं।”

आज सुशीला मीना और गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते हैं, इसमें स्कूल शिक्षक और कोच ईश्वर लाल मीणा का यहां योगदान है। ईश्वर लाल मीणा के प्रयासों के कारण आज यहां के बच्चे शानदार क्रिकेट खेलते हैं। कुछ साल पहले इसी स्कूल की एक छात्रा का क्रिकेट वीडियो वायरल हुआ था। वह अभी जयपुर एकेडमी में खेल रही है। ईश्वर लाल मीणा ने बच्चों को डेली स्कूल आने के लिए क्रिकेट सिखाना शुरू किया था। आदिवासी बच्ची सुशीला का बॉलिंग एक्शन पूर्व भारतीय क्रिकेटर जहीर खान जैसा है। जिस तरह से सुशीला बॉलिंग करती है, उसकी गेंद से बैट चूक जाए तो आउट होना निश्चित है।

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सुशीला के कोच ईश्वर लाल मीणा कहते हैं, “वायरल हुई तो लोग इतने खुश हैं कि अगर सुशीला भारतीय टीम के लिए खेले तो यहां के लोग कितने खुश होंगे। यहां तो लड़कियों की जिला स्तर की टीम भी नहीं बनती है। हम क्रिकेट सिखा रहे थे। सुशीला जब स्कूल में आई, तो हम उसे बैटिंग करवाते थे। एक साल पहले बॉलिंग कराई थी, और आज जो एक्शन वह कर रही है, वह पहले नहीं था। कई बार तो ऐसा भी कहा गया कि वह बॉलिंग नहीं कर सकती। हम क्रिकेट में यूट्यूब से बड़े-बड़े कोचों के वीडियो देख कर ड्रिल्स करवाते रहते हैं, जो कमियां होती हैं, उन्हें सुधारते हैं।”

आगे ईश्वर लाल मीणा बताते हैं कि सचिन सर ने पहले तीन वीडियो पोस्ट किए थे, और अब वे 100 मिलियन से अधिक व्यूज पार कर चुके हैं। सुशीला का जो बॉलिंग एक्शन है, वह तेज गेंदबाजी करती है, उस तरह इस क्षेत्र में कोई और नहीं कर पाता है। एक दिन ऐसा आएगा, जब वह भारतीय टीम के लिए खेलेगी।

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सचिन तेंदुलकर के इस पोस्ट के बाद सुशीला मीना वायरल हो गई। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को 100 मिलियन से अधिक लोगों ने देखा। इस वायरल वीडियो के बाद राजस्थान के उपमुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और अन्य लोग भी सुशीला से मुलाकात करने आ चुके हैं।

सुशीला के माता-पिता महज 300 रुपये की मजदूरी पर काम करते हैं। सुशीला के पिता रतन लाल मीणा कहते हैं, “हमें इंदिरा आवास मिला था, तो पास में घर बना रहे थे, लेकिन बीच में सुशीला की मां की तबियत खराब हो गई और इंदिरा आवास की अंतिम किस्त का पैसा उसके इलाज में खर्च हो गया। हमने बाइक ली है, उसका बाकी किस्त भरनी है, इसलिए हम अहमदाबाद मजदूरी करने जाते हैं।”

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सुशीला के पिता आगे कहते हैं, “हमारे पास पैसा नहीं है, इसलिए हम सुशीला को अच्छे स्थान पर ट्रेनिंग नहीं दिला सकते। उसके कोच जैसा कहेंगे, हम वैसा करेंगे। अगर सरकार कुछ मदद करती है तो सुशीला भारत के लिए खेल सकती है। सरकार ने सुशीला को गोद लेने की बात की है और सभी खर्च उठाने का वादा किया है, देखते हैं क्या होता है।”

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