उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य में मखाना की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए योजना शुरू की है। इसके तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 40,000 रुपए की सब्सिडी दे रही है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से राज्य में मखाना की खेती का विस्तार होगा, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा।
दुनिया भर में प्रसिद्ध भारत का मखाना जो की अभी तक मुख्यतः बिहार में उगाया जाता था। रिपोर्ट की मानें तो दुनिया का लगभग 85 से 90 प्रतिशत मखाना भारत में होता है, जबकि भारत का 90 प्रतिशत मखाना बिहार में होता है। लेकिन अब इसकी खेती की शुरुआत यूपी में भी की जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने मखाना की खेती के लिए किसानों को सब्सिडी देने की व्यवस्था बनाई है। इसके लिए, योगी सरकार का विशेष ध्यान पूर्वांचल पर है। क्योंकि पूर्वांचल क्षेत्र की जलवायु मखाना का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले बिहार के मिथिला क्षेत्र से मिलती-जुलती है। गोरखपुर मंडल के देवरिया जिले में बीते साल से मखाना की खेती शुरू हो गई है, जबकि मंडल के तीन अन्य जिलों गोरखपुर, महाराजगंज और कुशीनगर को कुल 33 हेक्टेयर में मखाना की खेती कराने का लक्ष्य दिया गया है।
33 हेक्टेयर में मखाना की खेती करने का लक्ष्य
देवरिया जिले में पिछले वर्ष से मखाना की खेती का प्रयोग शुरू हो चुका है। इस साल गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में 33 हेक्टेयर मखाना की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, गोरखपुर मंडल की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए काफी उपयुक्त है। मखाना की खेती उन क्षेत्रों में अधिक फायदेमंद होती है, जहां खेतों में जलभराव की स्थिति होती है।
गोरखपुर मंडल में तालाबों की अच्छी संख्या और लो लैंड एरिया में बारिश का पानी काफी समय तक भरा रहता है, जिससे यहां के किसान मखाना की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। सरकार ने मखाना की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपए का अनुदान देने का फैसला लिया है। एक हेक्टेयर में मखाना की खेती करने में लगभग एक लाख रुपए की लागत आती है, जिससे अनुदान की राशि किसानों की लागत का 40 प्रतिशत कवर करेगी। एक हेक्टेयर में मखाना की औसत पैदावार 25 से 29 क्विंटल होती है और वर्तमान में इसकी कीमत एक हजार रुपए प्रति किलो है।
मखाने की खेती समझते हैं
मखाने के सीजन की बात करें तो फरवरी से जुलाई तक माना जाता है। लेकिन नवंबर के महीने में नर्सरी बनाकर बीज का छिड़काव कर दिया जाता है। एक हेक्टेयर में अगर खेती करनी है तो 20 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है। फिर नर्सरी में पौधा फरवरी के दूसरे सप्ताह में तैयार हो जाता है। उसके बाद इसे जलजमाव वाले खेत में ट्रांसफर किया जाता है। खेतों में जुलाई तक ये पूरा हो के तैयार हो जाता है जिसके बाद प्रोसेसिंग का काम शुरू होता है। आम तौर पर मछुआरे ही इसकी फसल कटाई का काम करते हैं या फिर और भी लोग करते हैं जो इस काम के लिये स्किल्ड होते हैं।
मखाना, पोषक तत्वों का खजाना
मखाना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे सोडियम, पोटेशियम, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन सी। इसके सेवन से पाचन-तंत्र हेल्दी होने के साथ शरीर की कमजोरी भी दूर होती हैं। मखाने में कैलोरी काफी कम मात्रा में होती है। ऐसे में इसका सेवन वह लोग भी कर सकते हैं, जो वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसको हेल्दी स्नैक के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। मखाने को बच्चे से लेकर घर के बुजुर्गों को भी दिया जा सकता है।
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