सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन कार्यक्रम में केंद्र ने देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की पहल शुरू की और बिहार को 93.75 करोड़ रुपये की सहायता दी। बिहार सरकार ने पांच साल में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए विशेष पैकेज, उन्नत बीज, सीड हब और बेहतर फसल बीमा की मांग की है।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित दलहन अनुसंधान केंद्र से देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की नई पहल शुरू की गई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श और रणनीति कार्यक्रम में दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
बिहार में दलहन खेती को बढ़ावा
इस मौके पर केंद्र सरकार ने बिहार में दलहन खेती को बढ़ावा देने के लिए 93.75 करोड़ रुपये का चेक बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव को सौंपा।कार्यक्रम में रामकृपाल यादव ने बताया कि बिहार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना है। इसके लिए राज्य में उन्नत बीज, क्लस्टर आधारित खेती, किसानों का प्रशिक्षण और प्रसंस्करण इकाइयों की व्यवस्था की जा रही है।
बिहार में होगा दलहन राष्ट्रीय सम्मेलन
उन्होंने बिहार में होने वाले दलहन राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर को आमंत्रित भी किया।रामकृपाल यादव ने केंद्र सरकार से दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार की जलवायु और खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अरहर, चना, मसूर, उड़द और मूंग को राज्य की प्रमुख दलहन फसलें घोषित किया जाना चाहिए।
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कृषि मंत्री ने इसकी भी माँग की
साथ ही, राज्य में राष्ट्रीय स्तर का सीड हब स्थापित करने और 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से उच्च उत्पादक व रोग-रोधी बीज किसानों को उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई।उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में अक्सर बाढ़ और सूखे की स्थिति रहती है, इसलिए दलहन फसलों के लिए कम प्रीमियम वाली फसल बीमा योजना और मौसम से होने वाले नुकसान पर तुरंत मुआवजे की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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