उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने के साथ तिलहन और दलहन की अंतर-फसल को खेती का भविष्य बताया है। उन्होंने कहा कि सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलों को गन्ने के साथ उगाने से किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ सकती है। यह योजना 2026-27 से मिशन मोड में लागू होगी, जिससे कम लागत में ज्यादा उत्पादन, स्थिर आय और किसानों की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित होगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य की खेती को आगे बढ़ाने का सबसे असरदार तरीका गन्ने के साथ तिलहन और दलहन की अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उनका कहना है कि इससे गन्ना किसानों की आमदनी सिर्फ दोगुनी नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ सकती है।
अंतर-फसल को बढ़ावा
एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर गन्ने की खेती के साथ सरसों, मसूर, उड़द और मूंग जैसी फसलें उगाई जाएं, तो किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा, लागत कम होगी और साल भर स्थिर आय बनी रहेगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
खेती की ज़मीन बढ़ाना संभव नहीं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब राज्य में खेती की ज़मीन बढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने का एक ही रास्ता है—एक ही ज़मीन से ज्यादा पैदावार लेना। गन्ना आधारित अंतर-फसल मॉडल उत्तर प्रदेश की खेती का भविष्य है, जो किसानों को ज्यादा उत्पादन, ज्यादा आमदनी और जोखिम से सुरक्षा—तीनों देता है।
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करीब 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है गन्ने की खेती
उन्होंने निर्देश दिया कि इस योजना को 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू किया जाए। फिलहाल राज्य में करीब 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। अगर इतने बड़े इलाके में तिलहन और दलहन की अंतर-फसल जोड़ी जाती है, तो इससे उत्पादन में बड़ा इजाफा होगा और राज्य व देश दोनों स्तर पर तिलहन-दलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
पूरे प्रदेश में लागू हो यह योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गन्ने की पैदावार पर असर डाले बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त मुनाफा और अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। इसके लिए साल-दर-साल एक साफ रोडमैप तैयार किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना से होने वाला अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय बढ़ाएगा और राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में भी बड़ा योगदान देगा। साथ ही, यह योजना सिर्फ गन्ना किसानों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे प्रदेश की खेती को नया रूप देने का जरिया बने।
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