भारत-अमेरिका ट्रेड डील में भारत ने जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सोयाबीन और मक्का को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि कृषि जैसे संवेदनशील सेक्टर पर कोई समझौता नहीं होगा। अमेरिका चाहता था कि भारत GM फसलों को अनुमति दे, लेकिन भारत अपने रुख पर कायम रहा। हालांकि, सेब और कुछ ड्राई फ्रूट्स पर आयात शुल्क में सीमित राहत की संभावना जताई जा रही है।
भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को लेकर एक अहम बात सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, भारत ने इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) सोयाबीन और मक्का को देश में लाने की अनुमति नहीं दी है। यानी इन विवादित फसलों पर भारत ने अपनी सीमा नहीं तोड़ी है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि सरकार कृषि जैसे संवेदनशील सेक्टरों से कोई समझौता नहीं करेगी, और अब अधिकारियों की ओर से भी यही संकेत मिल रहे हैं कि GM सोया और मक्का पर भारत का रुख सख़्त बना हुआ है।
2024 में करीब 1.3 अरब डॉलर का था कृषि व्यापार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस डील के बाद भारत, अमेरिका से ज़्यादा कृषि उत्पाद खरीदेगा। वहीं, अमेरिका की कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने भी दावा किया है कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को बड़ा फायदा होगा और भारत जैसे बड़े बाज़ार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी। उनका कहना है कि इससे अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा भी कम होगा, जो 2024 में करीब 1.3 अरब डॉलर था।
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GM फसलों में कोई ढील नहीं
हालांकि, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि GM फसलों के मामले में कोई ढील नहीं दी जा सकती। भारत पहले से अमेरिका, ब्राज़ील, अर्जेंटीना और रूस से सोयाबीन तेल आयात करता है, जिस पर तय आयात शुल्क लगता है। लेकिन कुल सोयाबीन तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बहुत कम है।असल में अमेरिका ज़्यादा मात्रा में GM सोयाबीन का निर्यात करता है, और यही वजह है कि भारत इसे आयात करने की अनुमति नहीं देता। अमेरिका की कोशिश थी कि भारत GM सोयाबीन और GM मक्का को मंज़ूरी दे, लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं हुआ। हाँ, भारत ने सोयाबीन तेल पर शुल्क घटाने की पेशकश जरूर की थी।
अमेरिका से सेब के आयात पर शुल्क कम कर सकता है भारत
बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक ताज़े फलों के आयात से जुड़े कारोबारियों को उम्मीद है कि भारत अमेरिका से सेब के आयात पर शुल्क कम कर सकता है, या फिर सीमित मात्रा में शून्य शुल्क पर अनुमति दे सकता है। इसी तरह, ड्राई फ्रूट कारोबारियों को भी उम्मीद है कि पिस्ता और हेज़लनट जैसे ड्राई फ्रूट्स, जो भारत में बहुत कम उगते हैं, उन्हें तय सीमा तक बिना शुल्क मंगाने की छूट मिल सकती है।
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