बिहार सरकार मंगलवार को 2026–27 का करीब 3.70 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेगी। बजट से पहले आए आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि पर खास जोर दिखा है। अनाज उत्पादन बढ़ा है, लेकिन चावल की उत्पादकता घटी है, जबकि गेहूं और मक्का में ज्यादा वृद्धि हुई है। सरकार ने 2031 तक मखाना की खेती का रकबा 70 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा है और बागवानी व उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की बात कही है। हालांकि आम और लीची के क्षेत्रफल में बहुत मामूली बढ़ोतरी हुई है।
बिहार सरकार मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पेश करने वाली है। चुनाव के बाद नीतीश सरकार का यह पहला बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री विजय कुमार (बिजेंद्र) यादव सदन में रखेंगे। करीब 3.70 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित आकार वाले इस बजट से पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण ने साफ कर दिया है कि राज्य की कृषि नीति अब पारंपरिक अनाज के साथ-साथ मखाना, बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों पर ज्यादा फोकस करने जा रही है।
अनाज उत्पादन में बढ़त
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में बीते वर्ष कुल अनाज उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इस वृद्धि में गेहूं और मक्का की हिस्सेदारी चावल से अधिक रही है। रिपोर्ट बताती है कि सब्जी, फल, औषधीय और मसाला फसलों का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है, जो खेती के विविधीकरण की ओर इशारा करता है।
चावल की उत्पादकता घटी
सर्वेक्षण के अनुसार, चावल बिहार की प्रमुख फसल बना हुआ है, लेकिन इसकी उत्पादकता में गिरावट दर्ज की गई है।वर्ष 2023–24 में चावल की उत्पादकता 3062 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2024–25 में घटकर 2970 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई। इसका मतलब यह है कि चावल उत्पादन में जो बढ़ोतरी हुई, वह क्षेत्रफल बढ़ने की वजह से हुई, न कि प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ने से।वर्ष 2024–25 में कुल अनाज उत्पादन में चावल की हिस्सेदारी 40.7%, गेहूं की 32.01% और मक्का की 27.01% रही।
इन तीनों फसलों का कुल अनाज उत्पादन में लगभग 99.9% योगदान रहा। तुलना करें तो 2023–24 से 2024–25 के बीच चावल उत्पादन में 4.3%, गेहूं में 7.1% और मक्का में 12.6% की वृद्धि दर्ज की गई।
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2031 तक मखाना का रकबा 70 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य
आर्थिक सर्वेक्षण में बिहार के सुपरफूड मखाना पर खास जोर दिया गया है। सरकार ने कृषि रोड मैप 2026–2031 के तहत मखाना की खेती का क्षेत्रफल 70 हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।फिलहाल राज्य में करीब 40 हजार हेक्टेयर में मखाना की खेती हो रही है। वर्तमान में लगभग 32 हजार मीट्रिक टन मखाना का निर्यात हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 1.25 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की योजना है।मखाना, शहद और मशरूम की बागवानी क्षेत्र में हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत और उत्पादन में लगभग 7 प्रतिशत बताई गई है।
धान उत्पादन बढ़ा, फिर भी खरीद लक्ष्य घटाया
हालांकि धान और गेहूं बिहार की मुख्य फसलें हैं, लेकिन इस साल सरकार ने धान खरीद का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में कम रखा है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023–24 में धान उत्पादन 9522.8 हजार टन था, जो 2024–25 में बढ़कर 9934 हजार टन हो गया।इसके बावजूद खरीद लक्ष्य में कटौती कई सवाल खड़े कर रही है।
बागवानी में आम और लीची का विस्तार धीमा
आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि बिहार के बागवानी क्षेत्र में फल, सब्जियां, फूल, मसाले, औषधीय व सुगंधित पौधे, मखाना, शहद और मशरूम शामिल हैं। कुल बागवानी क्षेत्र का लगभग 25% हिस्सा फलों और करीब 60% हिस्सा सब्जियों के तहत है।हालांकि आम और लीची जैसी प्रमुख फसलों के क्षेत्रफल में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।लीची का रकबा 2023–24 में 39.2 हजार हेक्टेयर था, जो 2024–25 में 39.3 हजार हेक्टेयर हुआ।आम का क्षेत्रफल 164.6 हजार हेक्टेयर से बढ़कर करीब 165 हजार हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया।यानी तीन वर्षों में आम और लीची की खेती में विस्तार बेहद सीमित रहा है।
बजट से पहले आए आर्थिक सर्वेक्षण से साफ है कि बिहार सरकार कृषि को सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रखना चाहती। मखाना, बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों पर फोकस के साथ सरकार खेती को अधिक लाभकारी और निर्यात-उन्मुख बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि मंगलवार को पेश होने वाला बजट इन लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए क्या ठोस प्रावधान करता है।
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