सीएसआईआर–सीमैप, लखनऊ में 30–31 जनवरी 2026 को आयोजित किसान मेला–2026 में देशभर से करीब 4000 किसानों ने भाग लिया। मेले में औषधीय और सगंध पौधों की उन्नत खेती, नई किस्मों, तकनीकों और एरोमा मिशन की सफलताओं को साझा किया गया। सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने किसानों और वैज्ञानिकों के साझा प्रयासों की सराहना की। इस दौरान नई पुस्तकों, फसलों की किस्मों, तकनीकों का लोकार्पण और उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भी किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
लखनऊ।सीएसआईआर–केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CSIR-CIMAP), लखनऊ के परिसर में 30 और 31 जनवरी 2026 को दो दिवसीय किसान मेला–2026 का भव्य आयोजन किया गया। किसान मेले के दूसरे दिन देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 4000 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर सम्मानित अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।

‘यह मेला त्रिवेणी संगम जैसा है’ : सीएसआईआर महानिदेशक
किसान मेले के मुख्य समारोह की मुख्य अतिथि सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी ने कहा कि यह किसान मेला किसी त्रिवेणी संगम से कम नहीं है, जहाँ किसान, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि एक साथ मिलते हैं। उन्होंने सीएसआईआर-सीमैप के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों और किसानों के साथ मिलकर काम करने की वजह से एरोमा मिशन को बड़ी सफलता मिली है।
डॉ. कलैसेल्वी ने बताया कि एरोमा मिशन से जुड़ी सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 (विज्ञान टीम पुरस्कार) से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मिशन की वजह से आज कई किसान परिवार खुशहाल जीवन जी रहे हैं। साथ ही उन्होंने सीएसआईआर-सीमैप के नेतृत्व में वेटिवर बोर्ड के गठन का सुझाव भी दिया।
मेन्था उत्पादन में भारत को शीर्ष पर पहुंचाने में CIMAP की भूमिका
विशिष्ट अतिथि डॉ. अजीत कुमार शासनी, निदेशक, CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ ने कहा कि औषधीय और सगंध पौधों के क्षेत्र में सीएसआईआर-सीमैप का योगदान ऐतिहासिक है। संस्थान ने किसानों की आय बढ़ाते हुए भारत को मेन्था उत्पादन और निर्यात में विश्व में शीर्ष स्थान पर पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि सीमैप द्वारा विकसित मेन्था की किस्में किसानों में बेहद लोकप्रिय हैं। साथ ही नींबूघास, रोशाघास, पामारोजा और जिरेनियम जैसी फसलें कम पानी और वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं।

60 वर्षों का अनुसंधान, 150 से अधिक उन्नत किस्में
इससे पहले सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अतिथियों और किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान पिछले 60 वर्षों से औषधीय एवं सगंध पौधों पर अनुसंधान और विकास कार्य कर रहा है। अब तक 150 से अधिक उन्नत प्रजातियों, उनकी कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, भंडारण विधियों और उन्नत आसवन इकाइयों का विकास किया जा चुका है।
डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि आज विश्व के 80 प्रतिशत मेन्था का उत्पादन भारत में होता है और उसमें से 80 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। इस वर्ष लखनऊ मुख्यालय से किसानों को लगभग 500 क्विंटल उच्च उपज वाली मेन्था पौध सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
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एरोमा मिशन: किसान से उद्यमी तक का सफर
डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि एरोमा मिशन के तहत अब तक 5000 से अधिक किसान क्लस्टर बनाए जा चुके हैं, जिनमें 20 आदिवासी क्लस्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा किसानों के खेतों पर 400 उन्नत आसवन इकाइयाँ स्थापित की गई हैं और 121 किसान उद्यमी बन चुके हैं।

नई पुस्तकों, तकनीकों और किस्मों का लोकार्पण
मेले के दौरान ‘औस-ज्ञान्या’ नामक उपयोगी पुस्तिका और एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया, जिसमें एरोमा मिशन के तहत किसान से उद्यमी बने 121 लोगों की कहानियाँ शामिल हैं।इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों का लोकार्पण हुआ, जिनमें—डी-ऑयल्ड सगंध पौध अवशेषों को पशु आहार के रूप में उपयोग संबंधी तकनीकी बुलेटिन, सिट्रोनेला की नई किस्में CIM-हरितिमा और CIM-नित्या, लेमनग्रास और पोपी जीनोम और ceRNET 1.0 कम्प्यूटेशनल प्लेटफॉर्म
शामिल हैं।
उद्योगों को तकनीक हस्तांतरण
किसान मेले के दौरान अगरबत्ती निर्माण, रूम फ्रेशनर, जैव-फफूंदनाशी और मिट्टी सुधार से जुड़ी कई तकनीकों का उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण किया गया। साथ ही CIM-बेलपत्र बॉडी लोशन और CIM फ्लोरा सोल उत्पादों का भी शुभारंभ हुआ।
प्रदर्शनी और परिचर्चा सत्र
मेले में एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किसान-हितैषी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ किसानों की खुली परिचर्चा हुई, जिसमें किसानों के सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए।कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋषिकेश एन. भिसे ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव ने दिया।
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