डिजिटल राशन की ओर कदम: PDS में सरकार लाई e-RUPI वाउचर का प्लान

PDS में सरकार लाई e-RUPI वाउचर का प्लान

केंद्र सरकार PDS में गड़बड़ियां रोकने के लिए डिजिटल e-RUPI वाउचर का पायलट शुरू करने की तैयारी कर रही है। यह वाउचर आधार से जुड़े होंगे और लाभार्थियों को तय मात्रा में राशन लेने के लिए मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और चोरी रुकेगी, जबकि राशन दुकानदारों ने इस योजना का विरोध करते हुए मौजूदा वितरण व्यवस्था पर खतरा बताया है।

केंद्र सरकार का खाद्य मंत्रालय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में गड़बड़ियों और चोरी को रोकने के लिए डिजिटल e-RUPI वाउचर लाने की योजना बना रहा है। इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, देशभर के राशन दुकानदार इस योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

क्या है e-RUPI वाउचर?
इस योजना में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को जारीकर्ता बैंक और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को तकनीकी साझेदार बनाया गया है। ये e-RUPI वाउचर नकद नहीं होंगे, बल्कि राशन के हक का डिजिटल प्रमाण होंगे। यानी, जैसे 10 किलो गेहूं या 10 किलो चावल—वही मिलेगा, पैसे नहीं।ये वाउचर आधार से जुड़े होंगे, किसी और को ट्रांसफर नहीं किए जा सकेंगे और सिर्फ एक तय महीने के लिए मान्य होंगे। लाभार्थियों को ये वाउचर SMS या ‘मेरा राशन’ ऐप पर QR कोड के रूप में मिलेंगे।

गड़बड़ी की गुंजाइश होगी कमी
सरकार का कहना है कि इससे लाभार्थी अपने राशन पर खुद नियंत्रण रख सकेंगे और हर लेनदेन रिकॉर्ड में रहेगा, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम होगी।खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, आधार सत्यापन, e-PoS मशीन और ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ जैसी कई सुधारों के बावजूद अंतिम स्तर पर अब भी दिक्कतें बनी हुई हैं। कई जगह कम तौल, खराब अनाज, दुकानदारों की मनमानी और फर्जी बिलिंग की शिकायतें मिलती रहती हैं। e-वाउचर सिस्टम से इन समस्याओं पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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NIC हर महीने तैयार करेगा डेटा
इस व्यवस्था में पहले NIC हर महीने लाभार्थियों का डेटा तैयार करेगा, फिर SBI और NPCI के जरिए e-RUPI वाउचर बनाए जाएंगे। राशन लेते समय दुकानदार e-PoS मशीन पर QR कोड या वाउचर नंबर स्कैन करेगा और आधार या OTP से पुष्टि के बाद राशन दिया जाएगा।सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जीवाड़ा रुकेगा और सब कुछ रियल-टाइम में देखा जा सकेगा। बैंकों को भी इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली में मजबूत भूमिका मिलेगी।

यहाँ शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाद्य मंत्रालय ने अगले महीने से गुजरात के आनंद, साबरमती और दाहोद जिलों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना ली है। कुछ सप्ताह पहले एक सीमित क्षेत्र में इस अवधारणा का परीक्षण करने के लिए एक छोटा पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया गया था।
बिज़नेस स्टैण्डर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक राशन दुकानदारों का कहना है कि यह योजना मौजूदा राशन वितरण व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में एक कदम है। आपको बता दें कि भारत में लगभग 5 लाख राशन दुकानें हैं जो हर महीने लाखों टन अनाज लगभग 8 करोड़ लाभार्थियों को वितरित करती हैं।

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