आर्थिक सर्वे का संकेत: कृषि ही ‘विकसित भारत’ की रीढ़

कृषि ही ‘विकसित भारत’ की रीढ़

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की अगली विकास यात्रा में खेती की भूमिका सबसे अहम रहेगी। खेती अब सिर्फ अनाज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। पिछले पाँच सालों में कृषि क्षेत्र की औसत वृद्धि दर 4.4% रही है। इसमें सबसे तेज़ बढ़त पशुपालन और मत्स्य पालन में देखी गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

29 जनवरी को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि कहा गया है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे गांवों की आमदनी बढ़ेगी और समावेशी विकास को मजबूती मिलेगी।

सर्वे में कहा गया है कि भारत की अगली विकास यात्रा में खेती की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। अब खेती सिर्फ ज्यादा अनाज उगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों के जरिए खेती को ज्यादा मूल्य वाला बनाया जाएगा।

औसत सालाना वृद्धि दर करीब 4.4 प्रतिशत रही
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, हाल के वर्षों में मौसम की मार और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय खेती ने मजबूती दिखाई है। पिछले पाँच सालों में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की औसत सालाना वृद्धि दर करीब 4.4 प्रतिशत रही है, जो कई दशकों में सबसे बेहतर मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भी खेती की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही, जिससे इसकी स्थिरता साफ झलकती है।

ये भी पढ़ें – आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: कृषि उत्पादन बढ़ा, ग्रामीण भारत हुआ सशक्त

पशुपालन और मत्स्य पालन की अहम भूमिका
सर्वे में बताया गया है कि अब खेती की बढ़त का बड़ा हिस्सा पारंपरिक फसलों की बजाय पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे सहयोगी क्षेत्रों से आ रहा है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 के बीच कृषि और सहायक क्षेत्रों की दशकीय वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पहले के दशकों से ज्यादा है। इसमें पशुपालन की हिस्सेदारी सबसे अहम रही, जहां उत्पादन में 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई। वहीं मछली पालन और एक्वाकल्चर में 8.8 प्रतिशत की तेज़ बढ़त दर्ज की गई, जबकि फसल उत्पादन की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही।

पशुपालन की सालाना औसत वृद्धि दर करीब 13 प्रतिशत रही
पशुपालन में यह बदलाव साफ तौर पर दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2015 से 2024 के बीच इस क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) मौजूदा कीमतों पर लगभग 195 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान पशुपालन क्षेत्र की सालाना औसत वृद्धि दर करीब 13 प्रतिशत रही, जो खेती के बदलते स्वरूप को दर्शाती है।
मतलब आर्थिक सर्वे यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत की खेती ज्यादा विविध, ज्यादा टिकाऊ और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाली बनेगी।

ये देखें –

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *