तमिलनाडु में एफपीओ को मजबूत करने के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति

एफपीओ

कृषि मंत्रालय ने तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है। यह समिति एफपीओ के कामकाज, प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव और मूल्यवर्धन से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा करेगी और सुधार के सुझाव देगी। समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें आईसीएआर-एनआरसीबी सहित कई संस्थाएं सहयोग करेंगी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने तमिलनाडु में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी। इस समिति का काम एफपीओ की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना और उन्हें बेहतर तरीके से चलाने के लिए सुझाव देना होगा।

इरोड दौरे के बाद लिया यह फैसला
यह फैसला केंद्रीय मंत्री की हाल ही में तमिलनाडु के इरोड दौरे के बाद लिया गया। इस दौरान किसानों और अन्य हितधारकों ने एफपीओ से जुड़ी कई समस्याओं को सामने रखा था। मंत्री ने इन समस्याओं का समाधान करने के लिए जमीनी स्तर पर अध्ययन कर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

क्या करेगी समिति
समिति एफपीओ के प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव, तकनीकी मदद, मूल्यवर्धन और उनकी आर्थिक मजबूती जैसे मुद्दों पर ध्यान देगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि एफपीओ को और प्रभावी बनाने के लिए किन सुधारों की जरूरत है।इस समिति में नाबार्ड, नाफेड, एसएफएसी-तमिलनाडु, आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र (एनआरसीबी), एफपीओ प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हैं। सभी मिलकर एफपीओ की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे।

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तमिलनाडु की प्रमुख फसलों विशेष ध्यान
समिति खास तौर पर तमिलनाडु की प्रमुख फसलों जैसे केला, हल्दी, नारियल, टैपिओका और प्राकृतिक व जैविक खेती पर काम कर रहे एफपीओ पर ध्यान देगी। इसके लिए समिति किसानों, एफपीओ सदस्यों, बाजार से जुड़े लोगों और प्रसंस्करण इकाइयों से बातचीत भी करेगी।

दो महीने के भीतर तैयार करना है रिपोर्ट
समिति अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को सौंपेगी। इस पूरी प्रक्रिया में आईसीएआर-राष्ट्रीय केला अनुसंधान केंद्र, तिरुचिरापल्ली सहयोग प्रदान करेगा।सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य एफपीओ को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और तमिलनाडु में कृषि को बेहतर बाजार और मूल्य मिल सके।

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