तमिलनाडु के कून्नूर में 29 जनवरी को राष्ट्रीय चाय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के चाय निर्माता शामिल होंगे। FITMA की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में चाय उद्योग की चुनौतियों, नीति निर्माण, गुणवत्ता सुधार और चाय की खपत बढ़ाने की योजना “मिशन 1K” पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन भारतीय चाय के भविष्य को नई दिशा देने की कोशिश है।
तमिलनाडु के नीलगिरी पहाड़ों में बसा कून्नूर 29 जनवरी को देश के चाय उद्योग का केंद्र बनने जा रहा है। देशभर से चाय निर्माता और विशेषज्ञ यहां जुटेंगे, जहां भारतीय चाय के भविष्य, गुणवत्ता और खपत को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन होगा।
इस सम्मेलन का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन टी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (FITMA) कर रही है। यह संस्था देश के चाय निर्माताओं की एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है। सम्मेलन कून्नूर टी ट्रेड एसोसिएशन परिसर में होगा, जहां चाय उद्योग से जुड़े लोग एक मंच पर जुटेंगे।सम्मेलन में असम, नॉर्थ बंगाल और नीलगिरी जैसे प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों से चाय निर्माता हिस्सा लेंगे। अलग-अलग इलाकों से आए लोग अपने अनुभव साझा करेंगे और चाय उद्योग से जुड़ी चुनौतियों व संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य
इस सम्मेलन का मुख्य मकसद चाय निर्माताओं के बीच संवाद बढ़ाना है। यहां चाय उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार और नीतियों से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात होगी। साथ ही इस पर भी चर्चा की जाएगी कि भारतीय चाय को आने वाले समय में कैसे और बेहतर बनाया जाए।FITMA चाहती है कि चाय निर्माता और भारत का टी बोर्ड मिलकर काम करें। टी बोर्ड सरकारी संस्था है, जो चाय से जुड़ी नीतियां तय करती है। दोनों के साथ आने से नीतियां ज़मीनी हकीकत के मुताबिक बनेंगी और चाय उद्योग को मजबूती मिलेगी।
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‘मिशन 1K’ पर होगी खास चर्चा
सम्मेलन में FITMA की खास पहल “मिशन 1K” पर भी चर्चा होगी। फिलहाल भारत में एक व्यक्ति साल में औसतन 860 ग्राम चाय पीता है। FITMA का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 1,000 ग्राम प्रति व्यक्ति करना है। इसके लिए चाय को सेहतमंद और किफायती पेय के रूप में बढ़ावा देने की योजना है।FITMA का मानना है कि चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। “मिशन 1K” के जरिए हर घर तक चाय पहुंचाने और चाय उत्पादकों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
नीति निर्माण में सभी क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी
FITMA चाहती है कि असम, नॉर्थ बंगाल और नीलगिरी के चाय निर्माता टी बोर्ड की बैठकों में शामिल हों, ताकि हर क्षेत्र की समस्याएं सीधे नीति बनाने वालों तक पहुंच सकें।FITMA से जुड़े 650 से ज्यादा चाय निर्माता हर साल करीब 600 मिलियन किलो चाय का उत्पादन करते हैं। यह भारत के कुल चाय उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत है, जिससे इस संस्था की अहमियत और बढ़ जाती है।
कून्नूर में होने वाला यह राष्ट्रीय चाय सम्मेलन भारतीय चाय उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे चाय की गुणवत्ता, नीतियों और बाजार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है और भारतीय चाय को देश-दुनिया में और मजबूती मिलेगी।
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