भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) तय हुआ है। इस समझौते से भारत के 90% से ज्यादा उत्पादों को यूरोप में बिना शुल्क पहुंच मिलेगी, जिससे कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और केमिकल जैसे सेक्टरों को बड़ा फायदा होगा। भारत भी यूरोपीय उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से रियायत देगा, जबकि कृषि, डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है। इस डील से दोनों के बीच व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की। यह समझौता करीब 20 साल से ज्यादा समय तक चली बातचीत के बाद हुआ है। इसे अधिकारी “मदर ऑफ ऑल डील्स” बता रहे हैं, क्योंकि इससे लगभग 2 अरब लोगों का साझा बाजार तैयार होगा।
भारतीय उत्पादों को यूरोप में बिना शुल्क एंट्री
इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादों को यूरोपीय संघ के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। बाकी करीब 6 प्रतिशत उत्पादों पर भी शुल्क में कटौती और कोटा आधारित छूट दी जाएगी। FTA लागू होते ही यूरोपीय संघ पहले ही दिन 90 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म कर देगा। करीब 3 प्रतिशत उत्पादों पर यह शुल्क 7 साल में धीरे-धीरे खत्म होगा।
इस तरह कुल मिलाकर 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य पर भारत को रियायतें मिलेंगी।
इन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
बिज़नेस लाइन रिपोर्ट के मुताबिक ड्यूटी-फ्री एंट्री का फायदा जिन भारतीय क्षेत्रों को मिलेगा, उनमें कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट, समुद्री उत्पाद, केमिकल, प्लास्टिक और रबर, चमड़ा और जूते, बेस मेटल, रत्न-आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल का सामान शामिल हैं।फिलहाल इन उत्पादों पर यूरोप में 0 से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगता है, जो अब खत्म हो जाएगा।
भारत भी देगा यूरोप को रियायतें
वहीं दूसरी तरफ भारत भी यूरोपीय संघ के उत्पादों को 10 साल की अवधि में 93 प्रतिशत तक ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा।हालांकि, समझौते के पहले दिन भारत केवल 30 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क घटाएगा।कुल मिलाकर भारत 97.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य पर यूरोप को रियायतें देगा।
कार और इलेक्ट्रिक वाहन पर खास शर्तें
कारों के मामले में भारत ने कोटा आधारित रियायत दी है।25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारें यूरोप से भारत नहीं आएंगी, उन्हें भारत में ही बनाना होगा।और 25 लाख रुपये से ऊपर की कारों पर यूरोप की ज्यादा दिलचस्पी है, इसलिए वहां सीमित छूट दी गई है।फिलहाल भारत में कारों पर 66 से 125 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है।इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए छूट 5वें साल से शुरू होगी और अलग-अलग सेगमेंट में शुल्क धीरे-धीरे घटेगा।
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कृषि और डेयरी पर भारत सख्त
भारत ने डेयरी उत्पाद (जैसे चीज़), सोया मील और अनाज पर किसी तरह की ड्यूटी छूट नहीं दी है।वहीं यूरोपीय संघ भी चीनी, मांस, बीफ और पोल्ट्री सेक्टर को सुरक्षित रखेगा।
अंगूर और वाइन पर खास समझौता
भारत को यूरोप में टेबल ग्रेप्स (अंगूर) के लिए कोटा आधारित ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला है।करीब 85 हजार टन अंगूर, यानी लगभग 100 मिलियन डॉलर के निर्यात पर शुल्क नहीं लगेगा।वहीं भारत में महंगी वाइन पर आयात शुल्क 7 साल में 150 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत किया जाएगा।हालांकि 2.5 यूरो से सस्ती वाइन को कोई छूट नहीं मिलेगी।
सेवाओं और छात्रों के लिए भी मौका
सेवाओं के क्षेत्र में यूरोपीय संघ ने भारत को अब तक का सबसे बेहतर ऑफर दिया है।EU ने 155 में से 144 सेवा उप-क्षेत्र खोले हैं और भारत ने 102 उप-क्षेत्र खोले हैं। इसके अलावा छात्रों की आवाजाही और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा को लेकर भी कुछ अहम सहमति बनी है।फिलहाल भारत-EU के बीच वस्तुओं का व्यापार करीब 136 अरब डॉलर का है, जो अगले 3-4 साल में 200 अरब डॉलर को पार कर सकता है।सेवाओं का व्यापार भी 80-85 अरब डॉलर से बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
मतलब ये कि यह FTA भारत के निर्यात, रोजगार, उद्योग और किसानों के लिए बड़ा मौका लेकर आया है। खासतौर पर कपड़ा, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे सेक्टरों को इससे सीधा फायदा मिलने वाला है, वहीं भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी बनाए रखी है।
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