मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के किसान जसपाल पिछले कई वर्षों से 50 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं और उन्हें आज तक कभी घाटा नहीं हुआ। सही खेती तकनीक, बेहतर क्वालिटी और मजबूत मार्केटिंग स्ट्रैटजी के दम पर उन्होंने इस बार करीब ₹1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया।
टमाटर एक ऐसी फसल है, जो अगर 7–10 दिन में बाजार तक नहीं पहुँची तो खराब हो जाती है। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती को किसान अक्सर हाई रिस्क मानते हैं। लेकिन दूसरी सच्चाई यह भी है कि टमाटर की मांग सालभर बनी रहती है। अगर फसल की क्वालिटी अच्छी हो और मार्केटिंग सही हो, तो यही फसल किसानों को शानदार मुनाफा भी दे सकती है।

50 एकड़ में टमाटर की खेती
इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हैं मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के युवा किसान जसपाल। जसपाल पिछले कई सालों से करीब 50 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं और उनका दावा है कि उन्हें आज तक इस फसल में कभी घाटा नहीं हुआ। इस साल तो उन्होंने टमाटर की खेती से करीब ₹1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया है।

जब देशभर में टमाटर किसान परेशान, तब भी मुनाफे में जसपाल
आमतौर पर टमाटर किसानों की परेशानी की खबरें सामने आती रहती हैं—कभी दाम गिर जाते हैं, कभी बाजार में सप्लाई ज्यादा हो जाती है, तो कभी बीमारी या फल फटने से क्वालिटी खराब हो जाती है। पिछले साल जब देश के कई हिस्सों में किसान मजबूरी में टमाटर सड़कों पर फेंक रहे थे, उस वक्त भी शिवपुरी के जसपाल मुनाफे में बने रहे।

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खेती में जागरूकता और वैज्ञानिक तरीका
जसपाल की सफलता की सबसे बड़ी वजह है उनकी अवेयरनेस और वैज्ञानिक सोच। वे लगातार कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के संपर्क में रहते हैं, नई-नई टमाटर वैरायटी ट्रायल करते हैं और वैज्ञानिकों की सलाह से सही समय पर बुवाई, संतुलित मात्रा में खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल और सिंचाई और तुड़ाई की सही टाइमिंग पर खास ध्यान देते हैं। इसी वजह से उनकी फसल की क्वालिटी हमेशा बेहतर रहती है।

मार्केटिंग स्ट्रैटजी ने बदली किस्मत
जहाँ कई किसान मंडी में दाम गिरने पर नुकसान झेलते हैं, वहीं जसपाल की मार्केटिंग स्ट्रैटजी उन्हें अलग बनाती है। वे टमाटर की तुड़ाई से पहले ही Tomato Processing कंपनियों से संपर्क कर लेते हैं और फसल सीधे उन्हें सप्लाई करते हैं। इससे उन्हें स्थिर और बेहतर भाव मिल जाता है और बाजार की उठापटक का असर कम पड़ता है।

जसपाल के चार टिप्स
जसपाल आज टमाटर की खेती को सिर्फ खेती नहीं, बल्कि एक हाईटेक बिजनेस मॉडल की तरह चला रहे हैं। वे टमाटर की खेती में चार चीजों को जरूरी मानते हैं, पहला कंसिस्टेंसी यानी हर साल खेती करें ऐसा नहीं की एक साल घटा हो गया तो छोड़ दें फिर कुछ और देखें। उनके मुताबिक बने रहना चाहिए। दूसरा टाइमिंग यानी बुवाई से लेकर खाद पानी और कटाई तक की टाइमिंग सही रखनी चाहिए किसानों को। उनके मुताबिक तीसरा सबसे जरूरी चीज है, वैरायटी का चयन यानी किसान सही वैरायटी का चयन करें। केवीके के संपर्क में रहें, जैसे वे फ़िलहाल टमाटर की चार वैरायटी की खेती करते हैं। चौथा वो सबसे जरूरी मानते है पेस्ट और इन्सेक्ट कंट्रोल को। वो इसका बेहद ख्याल रखते है ताकि फसल खराब ना हो। मतलब ये कि जसपाल क्वालिटी पर फोकस रखते हैं और बाजार को समझकर फैसले लेते हैं।
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