बिहार में पिछले 10 साल में शहद उत्पादन 177% बढ़ा है। राज्य सरकार नई मधु नीति लाकर उत्पादन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करेगी। 2024 में देश के कुल शहद उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 12.30% रही। मधुमक्खी पालन योजना से किसानों, महिलाओं और युवाओं को कम लागत में रोजगार और अतिरिक्त आय मिल रही है।
बिहार में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 10 वर्षों में राज्य का शहद उत्पादन करीब 177 प्रतिशत बढ़ा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार अब नई मधु नीति लाने की तैयारी कर रही है, ताकि शहद से जुड़ी पूरी व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि सरकार शहद के उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, गुणवत्ता जांच, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक हर स्तर पर काम कर रही है। इसका मकसद बिहार के शहद को देश और विदेश के बाजारों में अच्छी पहचान और बेहतर दाम दिलाना है।
शहद उत्पादन में बिहार की मजबूत स्थिति
साल 2024 में देश के कुल शहद उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 12.30 प्रतिशत रही, जिससे बिहार देश के प्रमुख शहद उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है। अभी राज्य में करीब 18,600 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है और इस साल का लक्ष्य 22,000 मीट्रिक टन रखा गया है।
रोजगार और आय का आसान जरिया
सरकार की मधुमक्खी पालन एवं मधु उत्पादन योजना के जरिए छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन परिवार, महिलाएं और ग्रामीण युवा कम लागत और कम जगह में रोजगार पा सकते हैं। यह योजना “छोटी शुरुआत, बड़ा फायदा” के सिद्धांत पर आधारित है और गांवों में आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत कर रही है।
किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी
मधुमक्खी पालन से शहद और मोम जैसे उत्पादों से सीधी कमाई होती है। साथ ही, मधुमक्खियों द्वारा परागण से फल, सब्जी और तिलहनी फसलों की पैदावार और गुणवत्ता भी बढ़ती है। योजना के तहत मधुमक्खी बॉक्स, कॉलोनी, शहद निकालने की मशीन, फूड-ग्रेड कंटेनर जैसे जरूरी उपकरणों पर आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके अलावा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कृषि मंत्री ने किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं से अपने जिला उद्यान कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ लेने और बिहार की इस “मधु क्रांति” का हिस्सा बनने की अपील की है।
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