चना बुवाई बढ़ी, फिर भी बाजार में सख्ती क्यों?

चना बुवाई बढ़ी

चने की बुवाई इस साल बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। त्योहारों की बढ़ी मांग, पुराने चने का कम स्टॉक तथा आयात में कमी के कारण चने के दाम ₹225–300 प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं। भाव MSP के करीब हैं और आने वाले दिनों में भी MSP के आसपास बने रहने की संभावना है।

देश में रबी सीजन के दौरान चने की बुवाई बढ़ने के बावजूद बाजार में कीमतों की सख्ती बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल चने की बुवाई 95.88 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले 5.11 फीसदी ज्यादा है। इसके बाद भी चने के दाम बीते दो हफ्तों में ₹225 से ₹300 प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं और भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के करीब पहुंच रहे हैं।

पुराने चने का स्टॉक कम
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक त्योहारों के चलते चने की मांग में तेज़ी आई है। वहीं देश में पुराने चने का स्टॉक न केवल कम है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं मानी जा रही है। इसके अलावा पीली मटर (येलो पीज) के दाम बढ़ने से भी चने की तरफ मांग का रुख बढ़ा है।इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के अनुसार घरेलू और आयातित दोनों तरह के चने के दाम लगातार तीसरे हफ्ते बढ़े हैं। मंडियों में आवक कम बनी हुई है, जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

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आयात में कमी
बिज़नेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक आयात के मोर्चे पर भी दबाव कम हुआ है। इस सीजन में ऑस्ट्रेलिया से चना आयात करीब 6 फीसदी घटकर 3.89 लाख टन रह गया है। नई फसल आने से पहले आयातक भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिससे बाजार में सप्लाई और सख्त हुई है।

चने का MSP ₹5,875 प्रति क्विंटल तय
विशेषज्ञों का मानना है कि चने के दाम फिलहाल MSP के आसपास बने रह सकते हैं। रबी 2026–27 के लिए सरकार ने चने का MSP ₹5,875 प्रति क्विंटल तय किया है, जबकि 10 जनवरी को औसत मंडी भाव ₹5,417 प्रति क्विंटल दर्ज किए गए।

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